नयी दिल्ली (वार्ता). खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी के बीच अप्रैल में खुदरा मुद्रास्फीति घटकर 4.70 प्रतिशत रही। यह खुदरा मुद्रास्फीति का 18 माह का न्यूनतम स्तर है।
मार्च माह में खुरा महंगाई दर वार्षिक आधार पर 5.66 प्रतिशत और अप्रैल 2022 में खुदरा मुद्रास्फीति 7.79 प्रतिशत थी। यह लगातार तीसरा महीना है, जब खुदरा-मुद्रास्फीति कम हुई है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन (एनएसओ) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2023 में सभी वस्तुओं वाला सामान्य खुदरा मूल्य सूचकांक (आधार 2022-12=100) 178.1 अंक था। पिछले वर्ष अप्रैल में सामान्य खुदरा मूल्य सूचकांक 170.1 अंक था। मार्च, 2023 में खुदरा मूल्य सूचकांक 177.2 अंक था।
अप्रैल में खाद्य वस्तुओं के खुदरा मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति घटकर 3.84 प्रतिशत रही। मार्च 2023 में खाद्य वस्तुओं के वर्ग की महंगाई दर वार्षिक आधार पर 4.79 प्रतिशत थी।
अप्रैल में सब्जियों के दाम सालाना आधार पर 6.50 प्रतिशत घटे हुए थे। मसालों की महंगाई 17.43 प्रतिशत और ईंधन और बिजली के भाव सालाना आधार पर 5.52 प्रतिशत ऊपर थे।
इस समय खुदरा मुद्रास्फीति आरबीआई की 2-6 प्रतिशत की सहज सीमा के अंदर है, जिससे रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत ब्याज दर में वृद्धि पर विराम अभी अगली समीक्षा में भी बने रहने की संभावना बढ़ गयी है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक जून में छह से आठ तारीख तक होने वाली है। अप्रैल, 2023 में ग्रामीण क्षेत्र संबंधी खुदरा मुद्रास्फीति 4.68 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र की 4.85 प्रतिशत थी।
मिलवुड केन इंटरनेशनल के संस्थापक और सीईओ नीश भट्ट ने कहा कि खुदरा मुद्रास्फीति का अप्रैल में घट कर 4.7 प्रतिशत पर आना एक बड़ा अच्छा संकेत है। महीनों तक मुद्रास्फीति छह प्रतिशत से सात प्रतिशत के स्तर पर रहने के बाद इस समय नरमी पर है।
उन्होंने कहा कि खुदरा मुद्रास्फीति में यह गिरावट मुख्य रूप से उच्च तुलनात्मक आधार और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी के कारण है। श्री भट की राय है कि खुदरा मुद्रास्फीति में यह नरमी आरबीआई के लिए अगली समीक्षा बैठक में भी नीतिगत दर में वृद्धि पर विराम बनाए रखने में सहायक हो सकती है।