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अपनी ही सीट पर फंसे खुद को किंगमेकर कहने वाले ओपी राजभर, BSP ने बढ़ा दी टेंशन

लखनऊ

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को धूल चटाने के दावे करने वाले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओमप्रकाश राजभर अपनी ही सीट पर फंसते दिख रहे हैं। जहूरादाबाद सीट से उतरे ओपी राजभर को बसपा और भाजपा की ओर से मजबूत प्रत्याशी दिए जाने के चलते फंस गए हैं। भाजपा ने उनकी ही बिरादरी के कालीचरण राजभर को टिकट दिया है, जबकि बसपा ने इलाके की पुरानी नेता और जमीनी पकड़ रखने वालीं शादाब फातिमा को मौका दिया है। शादाब फातिमा की मुस्लिम समुदाय में अच्छी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में इस बात की आशंका है कि वह सपा गठबंधन से जो फायदा राजभर को होना था, उसकी काट कर सकती हैं।

दिलचस्प बात यह है कि इस सीट पर तीन पुराने नेता हैं और तीनों ही इस बार अलग-अलग पार्टी से मुकाबले में हैं। ओपी राजभर 2017 में भाजपा के साथ थे, लेकिन इस बार वह सपा के साथ गठबंधन में हैं। इसके अलावा सपा सरकार में कभी मंत्री रहीं शादाब फातिमा बसपा के टिकट पर लड़ रही हैं। वहीं बसपा से दो बार विधायक रहे चुके कालीचरण राजभर इस बार भगवा दल से उम्मीदवारी कर रहे हैं। माना जा रहा था कि राजभर बनाम राजभर के मुकाबले में सुभासपा के नेता भारी पड़ेंगे, लेकिन शादाब फातिमा की एंट्री ने उनका गणित बिगाड़ दिया है। 

अब तक यह मुकाबला ओपी राजभर और भाजपा के बीच ही माना जा रहा था, लेकिन अब त्रिकोणीय हो चला है। शादाब फातिमा जहूराबाद की पुरानी नेता हैं और मंत्री रहते हुए उन्होंने विधानसभा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम कराए थे। मुस्लिम समुदाय से इतर हर वर्ग में उनके समर्थक माने जाते हैं। वह 2017 में सपा में मचे घमासान के बाद शिवपाल यादव के साथ चली गई थीं और उनकी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी की नेता थीं। लेकिन इस बार जब शिवपाल और अखिलेश साथ आए तो उन्हें टिकट नहीं मिल पाया। यह सीट ओपी राजभर के खाते में चली गई।