भरतपुर।
राजस्थान के भरतपुर में महाराजा किशन सिंह ने अपने पिता महाराजा जसवंत सिंह की याद में 1920 से जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेले की शुरुआत की थी। लेकिन अब यहां पशु मेले का आयोजन सदा के लिए बंद हो जाएगा। राजस्थान पशुपालन विभाग के अतिरिक्त निदेशक ने जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेले की 12 हेक्टेयर जमीन को राजकीय पशु चिकित्सालय एवं पशु विज्ञान कॉलेज के लिए आवंटित कर दिया है। जानकारी के मुताबिक जिला कलेक्टर द्वारा इस जमीन को पशु चिकित्सालय एवं विज्ञान कॉलेज के लिए आवंटित करने का प्रपोजल पशुपालन विभाग के अतिरिक्त निदेशक को भेजा गया था।
अब कभी नहीं लगेगा ऐतिहासिक मेला
जमीन जाने के बाद अब 102 वर्ष से लग रहा ऐतिहासिक जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेला हमेशा के लिए बंद हो जाएगा। यह मेला ना केवल स्थानीय लोगों की श्रद्धा से जुड़ा हुआ था बल्कि पूरे उत्तर भारत में यह मेला काफी प्रसिद्ध रहा है। जो प्रशासनिक अधिकारियों और राजस्थान सरकार की इच्छा शक्ति की भेंट चढ़ गया है।
जसवंत प्रदर्शन एवं पशु मेले का इतिहास
इस मेले की शुरुआत महाराजा किशन सिंह द्वारा अपने पिता महाराजा जसवंत सिंह की याद में 1920 में की गई थी। भरतपुर के महाराजा जसवंत सिंह की याद में प्रदर्शनी और पशु मेले का आयोजन हर वर्ष दशहरा के अवसर पर किया जाता है। इस मेले में देश के कई राज्यों के व्यापारी अपनी दुकाने लगाते रहे हैं। यहां पशु मेला के साथ नुमाइश भी लगती है। जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेले से पशुपालन विभाग को हर वर्ष लाखों रुपये की इनकम भी होती है।