नई दिल्ली
ऐसी खबरें, जिनमें किशोरों ने तकनीक से जुगलबंदी कर खौफनाक वारदातों को अंजाम दिया हो, बढ़ती ही जा रही हैं। क्या इसकी जड़ में ऑनलाइन दुनिया का असर काम कर रहा है? किशोरों की दुनिया में सूचना तकनीक के असर पर काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. नेहा दत्त का आलेख
हाल ही में हुई बुली बाई ऐप की घटना हो या फिर वह घटना, जिसमें तीन किशोरों ने एक अनजान शख्स को इसलिए मार दिया, क्योंकि वो अपने दोस्तों के बीच अपना रौब जमाना चाहते थे, किशोरों की बदलती दुनिया को लेकर चिंता में डालने वाली हैं। उन्होंने इसका वीडियो बनाकर वायरल भी किया। उनके चेहरे पर न कोई खौफ था, न ही पछतावा। किशोरों के हिंसक बर्तावों कीऐसी घटनाएं बढ़ती ही जा रही हैं। कहीं वे इंटरनेट का बेजा इस्तेमाल करके लोगों को परेशान कर रहे हैं, तो कहीं किसी हिंसक वारदात को अंजाम दे रहे हैं। सवाल यह है कि किशोर उम्र में अपराध करने के लिए उन्हें कौन से हालात उकसा रहे हैं?