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कांग्रेस के चिंतन से राजस्थान के मंत्री मुश्किल में:’एक परिवार, एक टिकट’ से परेशानी; तय करना होगा खुद लड़ें या दूसरे को दें मौका

जयपुर

उदयपुर में हुए चिंतन शिविर में तय हुए फॉर्मेूले एक परिवार-एक टिकट ने राजस्थान के मंत्रियों की चिंंता बढ़ा दी है। प्रदेश में कई ऐसे मंत्री और नेता हैं, जिनके परिवार के सदस्य भी किसी न किसी पद पर है। ऐसे में नए फैसले के बाद उन्हें तय करना होगा कि या तो वे चुनाव लड़ेगे खुद रहेंगे या फिर परिवार में से किसी एक को मौका मिलेगा।

लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा का, चाहे प्रधान का चुनाव या जिला प्रमुख का। राजस्थान के कई मंत्री हैं, जिन्होंने लोकसभा में अपने परिजन के लिए टिकट मांगा। साथ ही, इनके परिजन जिलों में और पंचायत में प्रमुख-प्रधान भी हैं। हालांकि, पार्टी ने ताले के साथ चाबी भी दे दी है और एक शर्त रख दी है कि कम से कम पांच साल या इससे पहले से यदि परिजन राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय है, तो वह टिकट की दावेदारी कर सकता है। मंत्रियों में ऐसे कई हैं, जिनके बेटे राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय है।