जयपुर
राजस्थान में कोयला संकट गहराता जा रहा है। राज्य में पारसा ईस्ट एवं कांटा बेसिन कोल ब्लाक से 8 से 9 रैक प्रतिदिन की आपूर्ति अब बंद होने के कगार पर पहुंच गई है। राज्य को रोजाना 23 से 25 रैक प्रतिदिन की आवश्यकता है। कोयला संकट के बीच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राजस्थान के ऊर्जा मंत्री भंवर सिंह भाटी को मिलने का समय नहीं दे रहे हैं। ऊर्जा मंत्री भंवर सिंह भाटी का मंगलवार को सीएम भूपेश बघेल से मिलने का कार्यक्रम था। हालांकि, ऊर्जा मंत्री भाटी का कहना है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल यूपी चुनाव में प्रचार करने के लिए गए है। इसलिए मुलाकात नहीं हो पाई।
बिजली बनाने के लिए कोयला छत्तीसगढ़ से आता है
उल्लेखनीय है कि राजस्थान मे बिजली बनाने के लिए कोयला छत्तीसगढ़ से आता है। फिलहाल छत्तीसगढ़ सरकार ने कोयले खनन पर रोक लगा रखी है। ऊर्जा मंत्री भंवर सिंह भाटी ने बताया कि राजस्थान में कोल इंडिया लिमिटेड से जुड़े थर्मल पावर प्लांट कोटा में करीब 7 दिन, सूरतगढ़ में 3 दिन और छाबड़ा में 1 दिन के कोयले का स्टाॅक है। सीईए के मानदंडो के अनुसार पिट हेड से दूरस्थ तापीय विद्युत गृहों में 20 से 26 दिन का कोयला स्टाॅक होना आवश्यक है। कोयले की कमी से बिजली उत्पादन में व्यवधान रहा है। जिससे भविष्य में बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है। उल्लेखनीय है कि एक रैक में 4 हजार टन कोयला आता है। है। कोयले की कमी से बिजली उत्पादन में व्यवधान रहा है। जिससे भविष्य में बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है।