जयपुर
राजस्थान की भूमि पर 82 साल बाद चीते दिखाई देंगे लेकिन महज कुछ देर के लिए। क्योंकि चीता प्रोजेक्ट राजस्थान के हाथ से निकलकर मध्यप्रदेश के पास चला गया है। नामीबिया से चीतों को लाने के लिए भारत का विशेष विमान पहुंच गया है। विमान को चीते की तस्वीर संग पेंट किया गया है। इसे स्पेशल फ्लैग नंबर 118 दिया गया है। चीतों के नामीबिया से कार्गों विमान से 17 सितंबर को पहले जयपुर लाया जाएगा। इन्हें दो हेलीकाॅप्टरों से उसी दिन मध्यप्रदेश के कूनो-पालपुर राष्ट्रीय उद्यान भेजा जाएगा। पीएम मोदीन 17 नवंबर को अपने जन्मदिन के अवसर पर राष्ट्र को भेंट कर चीता प्रोजेक्ट का शुभारंभ करेंगे। चीतों को नेशनल पार्क के क्वारंटीन बाड़े में छोड़ा जाएगा। जयपुर एयरपोर्ट सूत्रों के मुताबिक एयरपोर्ट पर हेलीकॉप्टर में शिफ्ट करके चीतों को मध्य प्रदेश के कुनो पालपुर ले जाया जाएगा। अफ्रीका के नामीबिया से 8 चीते 16 सितंबर को जयपुर के लिए रवाना किए जाएंगे।17 सितंबर को जयपुर एयरपोर्ट पहुंचने के बाद इन्हें मध्य प्रदेश के कुनो पालपुर राष्ट्रीय उद्यान ले जाया जाएगा।
कोटा के मुकुंदरा में बसाने की योजना थी
दरअसल पहले चीतों को जैसलमेर जिले के शकरगढ़ बल्च और कोटा के मुकुंदरा में बसाने की योजना थी। दो वर्ष पहले नामीबिया में चीता फाउंडर की संस्थापक लाॅरी मार्कर टीम के साथ जयपुर आई थीं। चीता प्रोजेक्ट को लेकर वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों के साथ उनकी बैठक हुई थी। इसके बाद मार्कर ने जैसलमेर के शकरगढ़ बल्च और कोटा के मुकुंदरा का दौरा किया था और सराहना की थी। उन्होंने रणथंभौर भी देखा लेकिन पंसद मुकुंदरा आय़ा। लेकिन उनके दौरे के बाद वन विभाक की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। इसका फायदा उठाते हुए मध्यप्रदेश के वन विभाग ने सक्रियता दिखाई। मध्यप्रदेश के एक दल ने नामीबिया जाकर चीता विचरण क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने कूनो पापुर नेशनल पार्क में चीतों को बसाने की मंशा जताई।