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जोधपुर के चाय वाले को CM गहलोत ने बनाया मेहमान, यूजर्स बोले-जय जय जननायक, जानें मामला 

जयपुर

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने गृह जिले जोधपुर के एक चाय वाले को मुख्यमंत्री निवास पर बुलाया और उनके साथ पुरानी यादें ताजा की। दरअसल, सीएम गहलोत अपने राजनीतिक यात्रा के दौरान काफी संघर्ष में थे। संघर्ष के दिनों में सीएम गहलोत चाय वाले की थड़ी पर अक्सर चाय पीने के लिए जाते थे। इस व्यक्ति का नाम है किशनलाल राकांवत। रविवार को सीएम अशोक गहलोत किशनलाल राकांवत नाम व्यक्ति को जयपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास पर बुलाया। सीएम गहलोत ने मुलाकात की फोटो खुद सोशल मीडिया पर शेयर की है। सीएम की इस पहल की यूजर्स ने खूब तारीफ की है। 

सीएम गहलोत ने किया ट्वीट

सीएम अशोक गहलोत ने ट्वीट कर लिखा- शाम के निवास पर पवन पुत्र चाय एवं नमकीन, चांदपोल जोधपुर के संचालक किशनलाल राकांवत एवं उनके पुत्र रवींद्र राकांवत से स्नेहपूर्ण मुलाकात की। उनकी चाय की टपरी बर बिताए समय की यादें ताजा की। सीएम गहलोत पुरानी स्मृतियों को याद कर कुछ देर के लिए ठहर से गए। काफी देर तक निहारते रहे। पुरानी यादों को ताजा किया। रविवार की शाम मुख्यमंत्री निवास पर वे गहलोत के मेहमान थे। साथ में उनके पुत्र रवींद्र रांकावत भी थे। जोधपुर के चांदपोल में रांकावत की पवनपुत्र चाय और नमकीन के नाम से दुकान है।


यूजर्स के आए ऐसे कमेंट

सुनील सोयाल नामक यूजर्स ने लिखा-  बहुत शानदार माननीय मुख्यमंत्री आपकी संवेदनशीलता, स्नेह एवं करुणा के प्रति पूरा प्रदेश गौरवान्वित है। आप इसी तरह मंद-मंद मुस्कराते हुए तृतीय  श्रेणी के शिक्षकों की तबादला सूची जारी करें। एक यूजर्स ने लिखा- अच्छे समय में बुरे समय के  व्यक्तियों को याद रखने वाले ही जननायक कहलाते है, गहलोत साबह आप बुरे वक्त के उस दौर के साथियों को आज तक नहीं भूले वाकई में आप प्रेरणास्रोत  है। सुशील सिंह यादव नामक यूजर्स ने लिखा- जय जय जननायक।  एक यूजर्स ने लिखा- इस मुलाकात से अंदाज लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री को जननायक क्यों कहते है। उल्लेखनीय है कि सीएम गहलोत इस चाय की दुकान पर बैठकर राजनीतिक चर्चा किया करते थे। खूब गपशप किया करते थे। तब किशनलाल अपने पिता बंशीलाल के साथ दुकान चलाया करते थे। गहलोत ने किशनलाल को शॉल ओढ़ाई और चाय के साथ पुरानी यादें खूब ताजा की। सीएम गहलोत ने ट्वीट कर लिखा- चांदपोल जोधपुर के संचालक किशन लाल रांकावत एवं उनके पुत्र रवींद्र रांकावत से स्नेहपूर्ण मुलाकात की। उनकी चाय की टपरी पर बिताए समय की यादें ताजा की।