नई दिल्ली
थोक कीमतों पर आधारित मुद्रास्फीति (डब्ल्यूपीआई) के उच्च स्तर पर होने की वजह से कुछ अंतराल बाद खुदरा महंगाई पर दबाव पड़ने का जोखिम है। यह आशंका भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जताई है।
आरबीआई ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा कि औद्योगिक कच्ची माल की ऊंची कीमतें, परिवहन लागत, वैश्विक ‘लॉजिस्टिक’ और आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान मुख्य मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ा रहे हैं।
केंद्रीय बैंक ने कहा, ‘‘विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति में तेज वृद्धि के बीच थोक और खुदरा मुद्रास्फीति में बढ़ते अंतर की वजह से विनिर्माण लागत का दबाव कुछ समय बाद खुदरा मुद्रास्फीति पर पड़ने को जोखिम है…।’’ इसमें कहा गया कि रूस-यूक्रेन युद्ध और उसकी वजह से जिंसों की कीमतों में वृद्धि भारत समेत दुनियाभर के मुद्रास्फीति परिदृश्य को प्रभावित कर रही है।