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नई रिसर्च:रक्त का थक्का जमने से क्यों हो रही कोरोना पीड़ितों की मौत, वैज्ञानिकों ने बताई वजह; कहा, VWF मॉलिक्यूल इसका कारण

कोरोना के मरीजों में रक्त के थक्के क्यों जमते हैं, वैज्ञानिकों ने इसकी वजह बताई है। वैज्ञानिकों का कहना है, एक खास तरह का मॉलीक्यूल इसके लिए जिम्मेदार है। संक्रमित मरीजों में इस मॉलिक्यूल का स्तर बढ़ने में रक्त के थक्के जमते हैं और मौत का खतरा बढ़ता है। यह दावा रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जंस इन आयरलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने किया है।

इसलिए जमते हैं रक्त के थक्के
कोरोना के मरीजों में रक्त के थक्के क्यों जमते हैं, इसे समझने के लिए डबलिन के ब्यूमॉन्ट हॉस्पिटल में भर्ती कोरोना पीड़ितों पर रिसर्च की गई। इनका ब्लड सैम्पल लिया गया। ब्लड रिपोर्ट में सामने आया कि इन मरीजों में VWF मॉलिक्यूल का स्तर अधिक था, यह रक्त का थक्का जमाता है। वहीं, थक्के को जमने से रोकने वाले मॉलीक्यूल ADAMTS13 का स्तर कम था।

रिसर्च में मौत का कारण साबित हुआ
दोनों मॉलीक्यूल का बैलेंस बिगड़ने पर थक्के जमने लगते हैं और मौत का खतरा बढ़ता है। पिछली कई रिसर्च में यह साबित हो चुका है कि कोरोना के कई मरीजों की मौत रक्त का थक्का जमने से हुई है।

शोधकर्ता डॉ. जैमी ओ’सुलीवन का कहना है, कोरोना के मरीजों ADAMTS13 और VVF का लेवल मेंटेन रखने के लिए अभी और रिसर्च करने की जरूरत है।

वैक्सीनेशन के बाद थक्का जमने के संदिग्ध मामले आए

स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल में एक रिपोर्ट जारी की है, जिसके मुताबिक कोवीशील्ड के बाद 26 ऐसे संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनको ब्लीडिंग और खून का थक्का जमने की शिकायत हुई है।

गंभीर साइड इफेक्ट के डर से कई देशों ने इस वैक्सीन को सस्पेंड या इस पर प्रतिबंध लगा रखा है। हालांकि, कई हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि कोवीशील्ड के साइड इफेक्ट इस वैक्सीन के लाभ से बहुत ही कम हैं। भारत में यह पहली बार है, जब कोवीशील्ड से होने वाले गंभीर नुकसान को इस तरह स्वीकार किया गया है।

498 गंभीर मामलों का अध्ययन किया गया

मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उन्होंने कुल 498 मामलों का अध्ययन किया है, जो गंभीर थे। इनमें से उसे 26 ही ऐसे केस मिले, जिनमें कोवीशील्ड वैक्सीन लगने के बाद खून बहने या फिर खून का थक्का जमने की आशंका है। हालांकि कोवैक्सिन लेने के बाद खून के थक्के जमने या बहने जैसी कोई समस्या सामने नहीं आई है।

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