भाखड़ा प्रणाली की नहरों में 850 क्यूसेक पानी नहीं चलाने पर आंदोलन की चेतावनी
by seemasandesh
भाखड़ा के किसानों ने सिंचाई विभाग कार्यालय पर किया प्रदर्शन हनुमानगढ़ (सीमा सन्देश न्यूज)। नहरबंदी के दौरान सरहिन्द फीडर से भाखड़ा प्रणाली की नहरों में 850 क्यूसेक पानी नहीं चलाने पर भाखड़ा के किसानों ने आंदोलन करने की चेतावनी दी है। अप्रेल-मई में नरमा की बिजाई के लिए भाखड़ा प्रणाली की नहरों में 850 क्यूसेक पानी चलाने की मांग को लेकर भाखड़ा के किसानों ने शुक्रवार को सिंचाई विभाग कार्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद श्रीगंगानगर भाजयुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष गुरवीर सिंह बराड़ व भाखड़ा प्रोजेक्ट चेयरमैन मनप्रीत सिंह की अगुवाई में किसानों ने जल संसाधन उत्तर संभाग हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता अमरजीत मेहरड़ा से वार्ता की। इस मौके पर गुरवीर सिंह बराड़ ने कहा कि भाखड़ा नहर प्रणाली में 21 मार्च से 29 मई तक नहरबंदी ली जा रही है। इससे किसानों की गेहूं की फसल को भी नुकसान होगा तथा खरीफ फसल नरमे की बिजाई भी नहीं हो पाएगी। इससे किसानों की कमर टूट जाएगी। क्योंकि पहले सरसों की फसल पाले के कारण खराब हो चुकी है। अब नहरबंदी में गेहूं व नरमे की फसल का भी किसान पूरा उत्पादन नहीं ले पाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की समस्याओं और सिंचाई पानी उपलब्ध करवाने को लेकर सरकार बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। पिछले साल पूरी भाखड़ा प्रणाली के किसानों ने सिंचाई विभाग कार्यालय पर धरना दिया था। तब विभागीय अधिकारियों ने लिखित समझौते के तहत किसानों से वादा किया था कि सरहिंद फीडर से निर्धारित शेयर भाखड़ा के किसानों को दिलवाया जाएगा। लेकिन आज सरकार उस वादे से मुकर गई है। वह किसानों को सिंचाई पानी देने के लिए राजी नहीं है। इस कारण पिछले साल गेहूं की फसल की पैदावार घटकर आधी रह गई थी। नरमा फसल की भी किसान समय पर बिजाई नहीं कर पाए। सरकार का कोई विधायक रेगुलेशन की मीटिंग में नहीं आता। यह बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बने साढ़े चार साल का समय हो चुका है, सिंचाई मंत्री को हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर आने का समय नहीं मिला। जबकि मुख्यमंत्री अपनी लड़ाइयों में घूम रहे हैं। उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर का किसान पूरी तरह से नहरी पानी पर निर्भर है। वह सिंचाई पानी के लिए अधिकारियों के आगे गिड़गिड़ा रहा है लेकिन सरकार सुन नहीं रही। उन्होंने बताया कि भाखड़ा में निर्धारित 1200 क्यूसेक का शेयर है। लेकिन पिछले साल 850 क्यूसेक पानी दिलाने का लिखित समझौता सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने किया था। अगर समझौते अनुसार 850 क्यूसेक पानी ही मिल जाए तो किसान अपनी फसल को बचा सकेगा। अन्यथा किसान की फसल बिल्कुल खत्म है। लेकिन वे आज चेताने आए हैं कि अगर सिंचाई विभाग समय पर नहीं चेता तो चाहे कितने भी बड़े स्तर का आंदोलन करना पड़े, भाखड़ा का किसान पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि गुरुवार को विधानसभा में पंजाब के मुख्यमंत्री ने एक बयान जारी कर कहा है कि एक अप्रेल को सरहिन्द फीडर में पूरी क्षमता के हिसाब से पानी चलेगा। अगर सरहिन्द फीडर में पूरा पानी चलेगा तो भाखड़ा के किसानों को राजस्थान के हिस्से के मुताबिक पानी मिले। अगर ऐसा नहीं होता है तो सिंचाई विभाग कार्यालय में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। किसान अपने हक का पानी लेकर रहेगा। भाखड़ा प्रोजेक्ट चेयरमैन मनप्रीत सिंह ने कहा कि अप्रेल व मई माह में पंजाब राज्य सरहिन्द फीडर में पूरा पानी चलाएगा। इन महीनों में पंजाब राज्य में पानी की सिंचाई के लिए इतनी आवश्यकता नहीं होती है। इसलिए मई माह में सरहिन्द फीडर से दो सप्ताह तक पानी लेकर भाखड़ा प्रणाली की वितरिकाओं में चलाया जाए तो किसानों को नरमे की बिजाई करने में बहुत फायदा होगा। इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन जिलाध्यक्ष रेशमसिंह, भाखड़ा किसान संगठन संयोजक रायसिंह जाखड़, रामेश्वर वर्मा, रघुवीर सिंह वर्मा, सरपंच बलदेव सिंह अशोक, राजविन्द्र सिंह, जसकरण सिंह, गुरमीत सिंह, निर्मलसिंह, राजेश, गोपाल, विद्याधर शर्मा, चन्दसिंह, प्रदीप कुमार, गुरमेल सिंह सहित कई किसान मौजूद थे।