रोडवेज परिचालक पर जालसाजी से चयनित वेतनमान का लाभ लेने का आरोप
by seemasandesh
राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के मुख्य प्रबंधक को सौंपा ज्ञापन हनुमानगढ़ (सीमा सन्देश न्यूज)। राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम हनुमानगढ़ आगार में परिचालक पद पर तैनात एक कर्मचारी पर जालसाजी से चयनित वेतनमान का लाभ लेने का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता के अनुसार वर्तमान में उक्त परिचालक की ओर से खेल कोटे से विभागीय पदोन्नति पाने का भी प्रयास किया जा रहा है। शिकायतकर्ता निगम के ही एक कर्मचारी ने सोमवार को राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के मुख्य प्रबंधक को ज्ञापन सौंप जांच करवा कार्रवाई करने की मांग की। जानकारी के अनुसार महावीर प्रसाद जाट पुत्र ख्यालीराम ने आरोप लगाया कि रोडवेज परिचालक लखवीर सिंह पुत्र नक्षत्रसिंह ने गलत तरीके से जालसाजी व भ्रष्टाचार कर 9 वर्षीय चयनित वेतनमान हासिल कर लिया। इससे निगम को लाखों रुपयों का नुकसान हुआ है। वर्तमान में लखवीर सिंह की ओर से खेल कोटे से विभागीय पदोन्नति पाने का भी प्रयास किया जा रहा है। हनुमानगढ़ आगार के कर्मचारियों की ओर से पूर्व में भी आगार व मुख्यालय स्तर पर इस सम्बन्ध में शिकायत दर्ज करवाई गई लेकिन लखवीर सिंह ने अपने कुछ जानकार उच्चाधिकारियों की सहायता से शिकायतों को प्रत्येक स्तर पर दबा दिया। महावीर प्रसाद के अनुसार 20 नवंबर 2014 को परिचालक लखवीर सिंह की ड्यूटी हनुमानगढ़-रावला मार्ग पर सेवा संख्या 34 पर बतौर परिचालक थी। इनके वाहन में 5 यात्री बिना टिकट पाए जाने पर तिजारा आगार के निरीक्षण दल की ओर से रेडमार्क लगाया गया। रेडमार्क रिपोर्ट पर लखवीर सिंह ने हस्ताक्षर भी किए। इस प्रकरण की जांच में परिचालक लखवीर सिंह ने हनुमानगढ़ से 230 किलोमीटर दूर बीकानेर का फर्जी मेडिकल प्रस्तुत कर स्वयं को ड्यूटी पर न होना बताया जबकि सूचना के अधिकार के तहत हासिल जानकारी के अनुसार लखवीर सिंह की हनुमानगढ़ आगार कार्यालय के सभी दस्तावेजों में उपस्थिति दर्ज है। लखवीर सिंह ने वेतन रजिस्टर जीए 74 के अनुसार भी 20 नवंबर 2014 को उपस्थिति का ही वेतन उठाया है। हनुमानगढ़ आगार कार्यालय में इनका मेडिकल अवकाश स्वीकृत ही नहीं है और इन्होंने विभागीय जांच अधिकारी व तत्कालीन मुख्य प्रबन्धक अनिल पारीक से मिलीभगत कर स्वयं को बरी करवा लिया। महावीर प्रसाद के अनुसार 20 नवंबर 2014 के रिमार्क की शिकायत के प्रकरण में शिकायतकर्ता ने बीसीआर में लखवीर सिंह की रिपोर्ट की है। क्रू चैंज की ड्यूटी थी। इसी कारण मशीन में एक ही परिचालक का नाम भरा जाने के कारण हनुमानगढ़ से अलवर जाने वाले परिचालक के नाम मशीन भरी गई थी व उसी परिचालक के नाम राजस्व रसीद कटी थी। इसको आधार बनाकर जांच अधिकारी ने लखवीर सिंह को बरी कर दिया जबकि लखवीर सिंह 20 नवंबर 2014 से पूर्व लगातार 6 माह तक इसी ड्यूटी में चला है। तब लखवीर सिंह के नाम कभी भी मशीन नहीं भरी गई व कभी राजस्व राशि भी इनके नाम से जमा नहीं हुई तो लखवीर सिंह की ड्यूटी कैसे मानी गई व इनको विभाग ने वेतन कैसे दे दिया, इसकी भी जांच की जानी आवश्यक है। महावीर प्रसाद ने बताया कि लखवीर सिंह की निगम में आश्रित कोटे से 2006 में नौकरी लगी थी। तत्कालीन मुख्य प्रबंधक अनिल पारीक के नियुक्त होने के बाद लखवीर सिंह ने कभी मार्ग पर ड्यूटी नहीं की व सदैव मुख्य प्रबन्धक के लिए चालक-परिचालकों से अवैध वसूली का कार्य किया गया। इस कारण मुख्य प्रबंधक अनिल पारीक का पूरा आश्रय लखवीर सिंह हासिल था। लखवीर सिंह ने तकरीबन 6 माह तक हनुमानगढ़ टाउन पूछताछ शाखा के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर किए थे जबकि हनुमानगढ़ टाउन में कभी पूछताछ शाखा का कार्य हुआ ही नहीं। न ही वाहनों के आवागमन का कोई रजिस्टर संधारण किया गया। लखवीर सिंह को बिना कार्य किए केवल हस्ताक्षर करवाकर वेतन का भुगतान किया गया था जबकि वह सदैव मुख्य प्रबन्धक के साथ उनके कार्यालय या आगार की चैकिंग की बोलेरो में रहता था। इसकी भी जांच हो। महावीर प्रसाद के अनुसार वर्तमान में लखवीर सिंह की ओर से खेल कोटे से पदोन्नति के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जयपुर मुख्यालय में पदस्थापित सहायक संभाग प्रबंधक अनिल पारीक की ओर से लखवीर सिंह की हर स्तर पर पैरवी की जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे जालसाज व भ्रष्ट कर्मचारी की पदोन्नति होगी तो रोडवेज में एक और अनिल पारीक पैदा होगा जो उनसे भी अधिक नुकसान निगम को पहुंचाएगा। इसलिए परिचालक लखवीर सिंह के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई की जानी आवश्यक है। उधर, निगम के यातायात प्रबंधक राकेश राय के अनुसार पूर्व में भी परिचालक लखवीर सिंह के खिलाफ शिकायत मिली है। अब आई शिकायत की जांच कर रिपोर्ट मुख्य प्रबंधक को प्रस्तुत की जाएगी।