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शिक्षा मंत्री के आश्वासन पर पदोन्नति संघर्ष समिति धरना स्थगित

जयपुर। शिक्षक पदोन्नति संघर्ष समिति के विपिन प्रकाश शर्मा ने बताया पदोन्नति समिति के प्रदेशाध्यक्ष रामकेश दौसा के नेतृत्व में वरिष्ठ शिक्षक शिक्षामंत्री के घर पहुंचे थे। जहां शिक्षा मंत्री ने उनकी मांग माने जाने का आश्वासन दिया। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि अपना धरना समाप्त करने की भी अपील की और राज्य समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष अर्चना शर्मा को शिक्षा संकुल भेजा, जिन्होंने शिक्षामंत्री की बात दोहराते हुए धरना समाप्त करवाया साथ ही क्रमिक अनशन पर बैठे शिक्षकों को जूस पिलाकर उनकी अनशन तुड़वाया। समिति के प्रदेश संयोजक ऋषि पाकड़ ने बताया शिक्षा मंत्री के आश्वासन के बाद शिक्षकों के आमरण अनशन कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है।उनका कहना था कि हमारी एक ही मांग की थी कि जिन शिक्षकों ने नए शिक्ष सेवा नियम का गजट नोटिफिकेशन 3 अगस्त 2021 से पूर्व डिग्री कर ली है या विश्वविद्यालय में प्रवेश ले लिया है, उन्हें पदोन्नति प्रक्रिया में छूट दी जाए और सीधी भर्ती तथा पदोन्नति की योग्यताओं का समान किया जाए। गौरतलब है कि पहले किसी भी विषय में पोस्ट ग्रेजुएट करने वाले वरिष्ठ शिक्षक को व्याख्याता बनाया जाता था लेकिन नए नियमों में ग्रेजुएट के विषय में भी पोस्ट ग्रेजुएट होने वाले को पदोन्नति का पात्र माना गया है। पिछले दिनों शिक्षा विभाग की ओर से जो व्याख्याता विभिन्न विषयों में 2021-22 डीपीसी के लिए पात्रता सूचियां जारी की गई हैं वह भी नए राजस्थान शिक्षा सेवा नियम 2021 के तहत जारी की गई हैं। इसमें केवल उन 18421 वरिष्ठ अध्यापकों के नाम शामिल किए गए हैं जिनके ग्रेजुएट तथा पोस्टग्रेजुएट में समान विषय हैं। इसमें दस हजार वरिष्ठ अध्यापकों को बाहर कर दिया गया। ऐसे में अब शिक्षक नए नियमों का निरंतर विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि विभाग में विज्ञान और वाणिज्य संकाय बहुत कम संख्या में खोले जाते हैं वर्तमान में भी जिन सीनियर सैकेंडरी स्कूलों में नए संकाय खोले गए हैं उन सभी में केवल कला संकाय ही खोला गया है इससे विज्ञान व वाणिज्य संकाय वालों को पदोन्नति के बहुत कम अवसर मिलेंगे। वहीं दूसरी ओर आरपीएससी की ओर से व्याख्याता सीधी भर्ती परीक्षा के लिए जो आवेदन मांगे गए हैं उनमें भी ग्रेजुएट के विषयों में पोस्ट ग्रेजुएट होना आवश्यक नहीं रखा गया है।