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साम्प्रदायिक हिंसा के खिलाफ निकाला रोष मार्च

  • एसडीएम को राष्टÑपति और मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन
    हनुमानगढ़ (सीमा सन्देश न्यूज)।
    मेवात के नूंह में दंगा भड़काने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने एवं जयपुर से मुंबई ट्रेन में हुई हिंसा में मारे गए अनवर शेख निवासी जयपुर को आर्थिक सहायता देने की मांग को लेकर हिंदू व मुस्लिम समुदाय के नागरिकों ने सोमवार को जिला मुख्यालय पर रोष मार्च निकाला। रोष मार्च के बाद जिला कलक्ट्रेट पहुंचे राष्टÑपति एवं मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपे गए। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के इशाक खान ने कहा कि केन्द्र सरकार की ओर से हिन्दुस्तान की साम्प्रदायिक सद्भावना को बिगाड़ने का काम किया जा रहा है। इससे पूरे देश के मुस्लिम समुदाय में भयंकर आक्रोश है। हाल ही में मेवात में हुए इसका उदाहरण हैं। प्रशासन उन दंगों के कारणों की तह तक जाए बिना उन लोगों के साथ धक्काशाही कर रहा है जिन लोगों का इन दंगों से कोई सरोकार नहीं। उनके मकान तोड़े जा रहे हैं। एक समुदाय विशेष को टारगेट कर गिरफ्तारियां की जा रही हैं। दंगों में शामिल न होने के बावजूद मुस्लिम समाज के नाबालिग बालकों को निरूद्ध किया जा रहा है। इशाक खान ने कहा कि जिन्हें धार्मिक यात्रा निकालनी थी, उन्हें लाठी, गंडासे, डंडों की क्या जरूरत थी। पुलिस उन लोगों को टारगेट नहीं कर रही। उन्होंने ट्रेन में घटित हुई घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब उदयपुर में कन्हैयालाल की मौत हुई थी तब प्रदेश के मुख्यमंत्री की ओर से पीड़ित परिवार के लिए 50 लाख रुपए की घोषणा कर दी जाती है। उसी तरह की घटना अनवर शेख के साथ हुई लेकिन अनवर शेख के परिवार को कोई आर्थिक सम्बल प्रदान नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि अगर मेवात दंगों से पहले हत्याकांड के मामले में मोनू मानेसर और बिट्टू बजरंगी को गिरफ्तार कर लिया जाता तो मेवात में दंगे नहीं होते। लेकिन राजस्थान के मुख्यमंत्री की कमजोरी रही कि उन दोनों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि सरकार का दायित्व है कि वह सभी को एक नजर से देखे। भाईचारे को कायम रखने के लिए सरकार को सभी तरह के प्रयास किए जाने चाहिएं। उन्होंने मांग की कि मेवात में हुए दंगों के बाद पूरे हिन्दुस्तान में आरएसएस पर प्रतिबंध लगे। मृतक अनवर शेख के परिवार को मुआवजा राशि दी जाए। इस मौके पर आमीन भाटी, मोहम्मद हुसैन खोखर, नवदीप राणा, जगदीप, कासम अली, मौलवी मुफ्ती अहमद जिया, काले खान, मजीद खान, रमजान खान, मोहम्मद शब्बीर, गुरमीत सिंह, मौलवी आजम अली, आमीन नागरा, लतीफ खान, मंजिल नागरा आदि मौजूद थे।