बीकानेर
सरसों की बंपर आवक के चलते पिछले दो माह में सरसों तेल की कीमतों में प्रति टिन करीब 250 रुपए की गिरावट हुई है। स्थिति यह है कि बाजार में पाम ऑयल से भी सस्ती दरों पर सरसों तेल बिक रहा है। यही कारण है कि इन दिनों घरेलू उपभोक्ताओं का झुकाव मूंगफली, सोयाबीन और पाम ऑयल से ज्यादा सरसों तेल की तरफ हो गया है।
इतना ही नहीं पिछले एक माह में सरसों जिंस की कीमतों में भी प्रति क्विंटल करीब 1000 रुपए तक की गिरावट हुई है। कच्ची आढ़त व्यापार संघ के जगदीश पेड़ीवाल ने बताया कि 6600 रुपए प्रति क्विंटल बिक चुकी सरसों इन दिनों 5600 से 6100 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक रही है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष बीकानेर जिले में करीब दो लाख हैक्टेयर में सरसों की बिजाई हुई है। यह आंकड़ा पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा है। उन्होंने बताया कि फिलहाल रोजाना करीब 25 हजार क्विंटल सरसों जिंस की आवक अनाज मंडी में हो रही है। उन्होंने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक इस वर्ष राजस्थान में 38 से 40 लाख टन सरसों का उत्पादन होने की उम्मीद है।
अब भी एक किलो सरसों तेल की कीमत 165 रुपए
देश में इस वर्ष सरसों की बंपर आवक के चलते भले ही सरसों जिंस की कीमतों में लगातार गिरावट हो रही हो, लेकिन कीमतों में हुई इस गिरावट का असर खुदरा ग्राहकों पर कम ही देखने को मिल रहा है। अभी भी थोक और खुदरा बाजार के बीच ग्राहकों से करीब 10 से 15 रुपए प्रति किलो कीमतें अधिक वसूली जा रही है। सरसों तेल के टिन की बात करें तो यह 2325 रुपए में मिल रहा है।
ऐसे में प्रति किलो सरसों का तेल 155 रुपए होता है। लेकिन बाजार में अभी भी इसकी कीमत प्रति किलो 160 से 165 रुपए पर ही टिकी हुई है। इसी प्रकार मूंगफली तेल की कीमत थोक दरों के हिसाब से 172 रुपए प्रति किलो होती है, लेकिन खुले बाजार में यह 180 से 185 रुपए प्रति किलो बिक रहा है।
हालांकि सरसों तेल की कीमतों में पिछले दो माह में सरसों तेल की कीमतों में प्रति किलो करीब 10 रुपए की गिरावट हुई है। वर्तमान में मूंगफली तेल प्रति टिन 2550 से 2580, पाम ऑयल 2425 तथा सोयाबीन तेल प्रति टिन 2490 रुपए बिक रहा है।
थोक और खुदरा कीमतों में इतना फर्क क्यों
फड़ बाजार में खाद्य तेल के थोक कारोबारी हरीश कुमार उपाध्याय ने बताया कि थोक बाजार में खरीदार ज्यादा मात्रा में तेल की खरीद करते हैं। उनका टर्न-ओवर भी ज्यादा होता है। ऐसे में वे कम मुनाफे में भी काम कर लेते हैं। वहीं खुदरा व्यापारी राम कुमार सामसुखा के अनुसार थोक और खुदरा कीमतों में अंतर होना लाजिमी है।
खुदरा व्यापारी तेल के ट्रांसपोर्ट खर्च, छीजत और अपने मुनाफे को बिक्री में शामिल करता है। ऐसे में थोक और खुदरा कीमतों में प्रति लीटर करीब 10 रुपए प्रति लीटर का अंतर रहता ही है। पैकिंग तेल खुले तेल की तुलना में और ज्यादा महंगा होता है।