भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने 13 साल पुराने मामले में पूर्व मंत्री और इंदौर की राउ विधानसभा सीट से विधायक जीतू पटवारी को दोषी पाया है। उन्हें एक साल की सजा सुनाई गई है। साथ ही 10 हजार रुपये का जुमार्ना भी लगाया है। मामला शासकीय कार्य में बाधा डालने का है।
भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट ने जीतू पटवारी को शासकीय कार्य में बाधा डालने का दोषी पाया है। यह मामला 2009 का है। उस समय पटवारी युवा कांग्रेस के अध्यक्ष थे। उन्होंने राजगढ़ जिले में भाजपा सरकार के खिलाफ आंदोलन किया था। इस दौरान उनके खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने समेत बलवा और अन्य धाराओं में केस दर्ज हुआ था। इस मामले की सुनवाई भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रही थी। कोर्ट ने जब सजा सुनाई तब पटवारी, विधायक कुणाल चौधरी और अन्य समर्थक भी मौजूद थे।
जीतू पटवारी को आईपीसी की धारा 147 में छह महीने की सजा और एक हजार रुपये जुमार्ना हुआ है। इसी तरह धारा 332 में एक साल की सजा और 700 रुपये जुमार्ना लगाया है। लोक संपत्ति नुकसानी अधिनियम की धारा 3 के तहत एक साल की सजा और दो हजार रुपये जुमार्ना हुआ है। सजा सुनाए जाने के बाद जीतू ने आईपीसी की धारा 389 के तहत सेशन कोर्ट में जमानत की अपील की। उन्हें कोर्ट से तत्काल जमानत भी मिल गई है। उनके साथ-साथ कृष्ण मोहन मालवीय, सुरेंद्र, घनश्याम वर्मा को कोर्ट ने सभी धाराओं में दोषी पाया और सजा सुनाई है।
चुनाव लड़ने पर नहीं होगा असर
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8 (1) और 8 (2) के मुताबिक सजायाफ्ता व्यक्ति को चुनाव लड़ने से अयोग्य करार दिया जाता है। हालांकि, इसी धारा 8 (3) के तहत कहा गया है कि दो साल या इससे ज्यादा सजा होने पर व्यक्ति विशेष को चुनाव लड़ने से अयोग्य करार दिया जाएगा। इस नियम को देखते हुए पटवारी चुनाव लड़ सकते हैं क्योंकि उनकी सजा दो साल से कम ही है।