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अलविदा सिद्धार्थ शुक्ला:रिहेब सेंटर नहीं ब्रह्मकुमारी से जुड़े थे सिद्धार्थ शुक्ला, अपने नए घर में बनवा रहे थे मेडिटेशन रूम

मुंबई।

बिग बॉस 13 विनर सिद्धार्थ शुक्ला का 2 सितम्बर को निधन हो गया है। एक्टर को गुरुवार सुबह बेसुध हो गए थे, जिसके चलते उन्हें कोकिलाबेन अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था। एक्टर की बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए कूपर अस्पताल ले जाया गया था। साल 2017 में खबरें थीं कि सिद्धार्थ को नशे की लत लग गई है जिसके चलते वो दो सालों तक रिहेब सेंटर में रहे हैं, हालांकि अब एक्टर के जिम ट्रेनर सोनू का कहना है कि वो रिहेब सेंटर नहीं बल्कि ब्रह्मकुमारी से जुड़े थे।

नए घर में बनवा रहे थे मेडिटेशन रूम

दिवंगत सिद्धार्थ शुक्‍ला बचपन से अपनी मां के साथ ब्रह्माकुमारी सेंटर आया जाया करते थे। बहुत कम उम्र से दुनियावी चीजों से उनका मोहभंग था। वो अब जहां नया घर बनवा रहे थे, वहां वो बाकायदा एक विशाल मेडिटेशन रूम बनवा रहे थे। मुंबई के विले पार्ले सेंटर की ब्रह्मकुमारी तपस्‍व‍िनी बहन ने दैनिक भास्‍कर से बातचीत में यह सब कन्‍फर्म किया। उन्‍होंने कहा, ’वो 19 अगस्‍त को राखी पर आए थे। रक्षासूत्र बांध कर गए थे। हमारी हर्षा बहन ने उन्‍हें मेडिटेशन का कोर्स करवाया। वह माउंट आबू के मेन सेंटर भी गए। भगवान शिव की खूब आराधना करते थे।‘

रक्षाबंधन पर ब्रह्मकुमारी बहनों से मिलने पहुंचे सिद्धार्थ।

रक्षाबंधन पर ब्रह्मकुमारी बहनों से मिलने पहुंचे सिद्धार्थ।

बिग बॉस में जाने से पहले आशीर्वाद लेने आए थे सिद्धार्थ

तपस्विनी बहन आगे कहती हैं,’ सिद्धार्थ मिजाज से सहयोगी थे बहुत। अच्‍छे और सच्‍चे व्‍यक्ति थे। दानी भी थे बहुत बड़े। किसी को धोखा देकर नंबर वन बन जाने की मंशा नहीं रहती थी। कभी नहीं लगा कि लाइफ को लेकर वो किसी तरह के तनाव आदि में हैं। ‘बिग बॉस’ में जाने से पहले वो मेडिटेशन करने हमारे सेंटरों में आए थे। सभी से आशीवार्द लिया। फिर वापस गए। वहां से जीत हासिल करने के बाद फिर हम सबों के बीच आए थे। वो रेगुलर टच में रहते थे। तीन दिन पहले जन्‍माष्‍टमी पर भी हम सब को विश किया था। अब जहां वो नया मकान बना रहे थे, वहां एक मेडिटेशन रूम भी बनवा रहे थे।‘

ब्रह्मकुमारी समाज के रीति-रिवाजों से होगा अंतिम संस्कार

सिद्धार्थ शुक्ला का अंतिम संस्कार ब्रह्मकुमारी समाज की रीति-रिवाजों से होगा। यहां की तपस्विनी बेन अंतिम संस्कार की प्रक्रिया बताते हुए कहा है, पार्थिव शरीर के चारों तरफ बैठकर मेडिटेशन करते हैं। टीका लगाने और चादर ओढ़ाने के बाद मेडिटेशन किया जाता है, जो 15 मिनट तक चलता है। हम मानते हैं कि परमात्वा शिव का हाथ उनके साथ है।

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