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REET में विज्ञान-तकनीक की तैयारी:कोरोना पर भी पूछे जाएंगे सवाल, रटने की बजाय कॉन्सेप्ट करें क्लियर, लेवल-1 और लेवल-2 दोनों में है स्कोरिंग टॉपिक

जयपुर

विज्ञान और तकनीकी विषय तथ्यों और मेथड पर आधारित होता है। रीट के हिसाब से विज्ञान और तकनीक स्कोरिंग सब्जेक्ट है। एक बार कॉन्सेप्ट समझ लिया तो आसानी से उस टॉपिक के प्रश्न हल कर सकते हैं। ये ऐसा है, जिसे रटने की जरूरत नहीं। बायो केमिस्ट्री, फिजिक्स, बॉटनी, टीचिंग मेथड्स, टेक्नोलॉजी में किन छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखना है।

परीक्षार्थियों के लिए स्कोरिंग टॉपिक कौन से हैं। पहले क्या पढ़ें, बाद में क्या पढ़ें, रिविजन कैसे करें। तमाम बिन्दुओं पर रीट अभ्यर्थियों को जानकारी होना जरूरी है। लेवल 1 और लेवल 2 में क्या-क्या भिन्नता है। कैसे समस्याओं का समाधान पाया जा सकता है। स्टडी कैसे की जाए, कितनी की जाए और पाठ्यसामग्री कैसी हो। इसके लिए सब्जेक्ट एक्सपर्ट धर्म सिंह दे रहे हैं दैनिक भास्कर ऐप के माध्यम से ये खास टिप्स।

विज्ञान और तकनीकी सिलेबस कम समय में कैसे कवर होगा?
रीट सिलेबस के महत्वपूर्ण टॉपिक का चयन करें। इसके लिए पिछली परीक्षाओं में पूछे गए टॉपिक को छांट लें। इससे पता चलेगा कि कौन-कौन से टॉपिक से ज्यादा प्रश्न आते हैं। किसी भी टॉपिक को रटने की प्रवृत्ति को छोड़ उसका रिवीजन करें। जो टॉपिक बार-बार रिवीजन करने पर भी समझ नहीं आ रहा, उसमें समय लगाने की बजाय पहले से जो पढ़ चुके हैं उन्हें मजबूत करें।

कौनसे टॉपिक इंपॉर्टेंट हैं, लेवल-1 और लेवल-2 के हिसाब से अलग-अलग बताएं?

  • रीट लेवल-2 साइंस विषय के 4 भाग हैं। बायो, केमिस्ट्री, फिजिक्स व टेक्नोलॉजी।
  • बायो में मानव शरीर और रोगों से संबंधित टॉपिक।
  • बॉटनी में आर्थिक मह्त्व (पादप संबंधित)।
  • नये जोड़े गए टॉपिक, पर्यावरण एवं पर्यावरणीय मुद्दे, जैव विविधता।
  • केमिस्ट्री में- रासायनिक अभिक्रिया व समीकरण, परमाणु, अणु, बहुलक, हाइड्रोकार्बन, अम्ल, क्षार, लवण।
  • फिजिक्स में प्रकाश, विद्युत, बल एवं गति, चुम्बक इनसे संबंधित सवाल, न्यूमेरिकल प्रश्न पूछे जाते हैं।
  • टेक्नोलॉजी में विभिन्न तकनीकी के उपयोग
  • टीचिंग मेथड से जुड़े सभी टॉपिक महत्वपूर्ण हैं।
  • लेवल-1 में मानव तंत्र और पर्यावरण (विशेषकर प्रदूषण), संक्रामक और असंक्रामक रोग।

कोरोना वायरस का टॉपिक रहेगा महत्वपूर्ण
कोरोना महामारी को लेकर इस बार रीट में कम से कम दो प्रश्न पूछे जाने की संभावना है, इसलिए कोरोना से जुड़ी बेसिक जानकारी जरूर पढ़ लें। जैसे- कोरोना वायरस का पूरा नाम (SARS CoV 2- severe acute respiratory syndrome corona virus 2), इससे कौन-कौन से ऑर्गन इफेक्ट होते हैं, जैसे- लंग्स, रेस्पिरेटरी सिस्टम, इसी टॉपिक में से तकनीकी सवाल जैसे कोरोना मरीजों की पहचान के लिए कौन सा ऐप है (अरोग्य सेतू और कोरोना वैक्सीन के लिए को-विन)। इसी तरह भारत में कौन-कौनसी वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी है। उसका नाम और कंपनी के बारे में पूछा जा सकता है। इसलिए कोरोना वायरस के बेसिक टॉपिक को पूरा कवर कर लें।

पहले कौन से टॉपिक क्लियर करने चाहिए
उन टॉपिक को पहले पढ़ा जाए जो आपको अच्छी तरह समझ में आते हैं। आपको पूर्ण आत्मविश्वास है कि इस टॉपिक से संबंधित कोई भी प्रश्न मैं गलत नहीं कर सकता। उसके बाद जिन टॉपिक में समस्या है उनके संबंधित सरल चीजों को याद करें, जिससे ज्यादा सिलेबस कवर होगा।

कोई विद्यार्थी सब्जेक्ट में कमजोर है तो क्या करें
सब्जेक्ट से जुड़े आसान टॉपिक को पहले पढ़ें, जिससे कि याद रहने में आसानी रहे।

कोई टॉपिक समझ में नहीं आ रहा तो क्या करें?
वैसे परीक्षा की सही तैयारी यही है कि टॉपिक को क्लीयर करते हुए आगे बढ़ें, लेकिन अभी समय की कमी है। तो टफ टॉपिक की बेसिक जानकारी जरूर पढ़ लें, उसके बाद ही आगे बढ़ें।

विज्ञान व टेक्नोलॉजी की तैयारी के लिए कौनसे टिप्स अपनाएं?

  • साइंस व टेक्नोलॉजी प्रैक्टीकल सब्जेक्ट है, इसलिए जितना हो सके रटना छोड़कर समझने पर भरोसा करें।
  • दोनों ही विषयों में पहले की अपेक्षा वर्तमान परीक्षाओं में अनुप्रयोगात्मक प्रश्नों (Applied Questions) पर अधिक बल दिया जाता है, इसलिए तैयारी उसी अनुसार करें।
  • फिजिक्स और केमिस्ट्री से संबंधित आंकिक प्रश्नों (Numerical Questions) पर भी समान ध्यान दें।
  • मैथ्स के सूत्र कंठस्थ याद करें और उससे संबंधित प्रश्नों का अभ्यास अवश्य करें
  • प्रश्नों को हल करने से पहले उसे उचित रूप से ध्यानपूर्वक अवश्य पढ़े उसके बाद उत्तर दें

एनसीईआरटी पढ़ें, बोर्ड की बुक से पढ़ें या फिर ऑनलाइन?
हालांकि विज्ञान विषय में तथ्यों में भिन्नता बहुत कम पाई जाती है। क्योंकि इसकी विषयवस्तु प्रायोगिक रूप से सत्यापित है, लेकिन फिर भी कभी ऐसा देखने को मिलता है, तो केवल एनसीईआरटी और राजस्थान बोर्ड की बुक को ही प्रामाणिक माना जाए।

पुराने पेपर और टेस्ट सीरीज है उपयोगी

  • पुराने पेपर से आपको अध्ययन में सुविधा होती है। इनसे आपको टॉपिक के महत्व और सवाल पूछने के तरीके का पता चलता है।
  • किस टॉपिक से कितने और कहां-कहां से सवाल पूछे जा सकते हैं, उसका भी पता चल जाता है।
  • कोचिंग की टेस्ट सीरीज अनुभवी अध्यापकों द्वारा तैयार की जाती है। इससे आप अपनी तैयारी का आंकलन सही प्रकार से कर पाते हैं।
  • आपकी स्टडी को मजबूती मिलती है, आत्मविश्वास बढ़ता है।

कौनसे टॉपिक से कितने नंबर के सवाल निकलते हैं, जिस पर फोकस किया जाए
रीट में ऐसा विभाजन नहीं है।

ऑनलाइन बनाम ट्रेडिशनल स्टडी में किसे मानें बेहतर?
दोनों तरीके से स्टडी की इम्पॉर्टेंस है। विषय का गहनता से अध्ययन करने के लिए ट्रेडिशनल यानी ऑफलाइन विकल्प बेहतर है। जो छात्र एक या अधिक बार ऑफलाइन स्टडी कर चुके हैं, उनके लिए ऑनलाइन स्टडी बेस्ट है, जो कोचिंग के लिए शहर नहीं जा सकते या ऑफलाइन पढ़ने में असमर्थ हैं। वे ऑनलाइन माध्यम से बेहतर स्टडी कर सकते हैं। कोरोना काल में ऑनलाइन एक बेहतर विकल्प बनकर उभरा है।

किस तरह की समस्याएं छात्रों को आती हैं?
रीट विद्यार्थियों की मुख्य समस्या साइकोलॉजी और टीचिंग मेथड में आती है। बायोलॉजी के स्टूडेंट्स को मैथ के फॉर्मूला और न्यूमेरिकल प्रश्नों में समस्याएं आती हैं। मैथ विषय के स्टूडेंट्स को बायो के टर्म्स याद करने और वैज्ञानिकों के नाम याद करने संबंधी मुख्य समस्याएं देखने को मिलती हैं।

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