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जोधपुर में कौन नेता किसका कच्छा-बनियान लेकर भागा:शिक्षा निदेशालय में ‘सुपर डायरेक्टर’ बने टीचर के जलवे, जयपुर में धर्म और सियासत का माइक्रो कॉकटेल

जयपुर

पंचायतीराज चुनाव में प्रदेश के मुखिया के गृह जिले में कांग्रेसियों ने पूरा जोर लगा दिया है। जगह-जगह सभाएं हुईं। ऐसी ही सभा में प्रदेश के मुखिया के एक कट्टर समर्थक ने जो कुछ कहा इसके बाद लोग चुटकियां ले रहे हैं, ऐसे समर्थक है तो फिर दुश्मनों की जरूरत ही क्या है। पूर्व जिला परिषद सदस्य रहे इस समर्थक ने भरी सभा में सचिन पायलट समर्थक कांग्रेस के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष के लिए कहा कि ‘मुखिया’ ने ही उसे आगे बढ़ाया और वहीं कच्छा बनियान तक खोलकर ले गया। इस पर मुखिया के बेटे तो कुछ नहीं बोले, लेकिन पार्टी पर्यवेक्षक ने लताड़ जरूर लगाई।

सीकर कनेक्शन को सभी का नमस्कार…

बीकानेर शिक्षा निदेशालय में कई शिक्षक लगे हैं, लेकिन दबदबा एक ही शिक्षक का है। एग्जाम करवाने वाले सेक्शन से जुड़े ग्रेड सेकंड शिक्षक का रूतबा पूरे विभाग में चर्चा का विषय है। डायरेक्टर साहब भी इन्हें बॉस जैसा सम्मान और तवज्जो देते हैं। इसके पीछे सीकर कनेक्शन है। शिक्षक के परिवार का सियासी वजूद है। यही वजह है कि पूरे निदेशालय में उनके नाम का डंका बजता है। पावर तो पावर है। अभी तो हां साहब, लेकिन मन में हिसाब बराबर करने की हसरत लेकर कई बैठे हैं।

विधायकजी का टेंपल रन है..

जयपुर की किशनपोल सीट किसी न किसी वहज से चर्चा में आ ही जाती है। विधायक के साथ भी चर्चाएं जुड़ ही जाती हैं। अल्पसंख्यक समुदाय से संबंध रखने वाले किशनपोल के विधायक का इस बार टेंपल रन चर्चा में है। विधायक क्षेत्र के प्रसिद्ध मंदिरों में दर्शन और परिक्रमा के लिए लाइन में लगे देखे जा रहे हैं। विधायक का यह सुफियाना धार्मिक अंदाज हर किसी की जुबां पर है। टेंपल रन के पीछे कोई तो सियासी कारण है। नेता यूं ही लाइन में तो नहीं खड़े होते।

सियासी पावर की बदहजमी से भैरव मंदिर के पुजारी हटे

जयपुर का ऑक्सीजन हब कहे जाने वाले सेंट्रल पार्क में बने भैरव मंदिर के पुजारी को हटाने का मामला सियासी हलकों में सुर्खियां बिखेर रहा है। यहां रसूखदार लोग घूमने आते हैं। भैरव मंदिर का पुजारी एक ऐसे ही रसूखदार को खटक गया। फिर क्या था। उन्हें हटाकर नया लगा दिया। इस पूरे मामले में 9 जनपथ वाले नेताजी के नाम का इस्तेमाल हुआ। धर्म और सियासत का ऐसा माइक्रो कॉकटेल शायद ही कहीं देखने को मिले। सियासी पावर की बदहजमी के लक्षण इसी रूप में सामने आते हैं।

राजनीति में जो होता है वह दिखता नहीं, बुरे फंसे नेताजी

पूर्व विदेश मंत्री के पुत्र को जिला परिषद चुनाव से पहले जोर-शोर से BJP में घर वापसी करवाई गई। पिछले ढाई साल से सियासी वनवास झेल रहे नेताजी को भरतपुर जिला प्रमुख के पद पर उम्मीदवार बनाने का आश्वासन मिला था। जैसे ही वोटिंग खत्म हुई, बीजेपी नेताओं के सुर बदल गए। प्रभारी ने दो टूक कह दिया कि रिजल्ट के बाद सदस्यों से राय से जिला प्रमुख प्रदेश नेतृत्व तय करेगा। पार्टी का एक खेमा विरोध में है। नेताजी को महसूस हो गया कि राजनीति में जो होता है, वह दिखता नहीं और जो दिखता है वह होता नहीं।

जातियों के टैलेंट ने घेरा संकटमोचक मंत्रीजी को

सरकार के संकटमोचक मंत्री के बयान सरकार और पार्टी के लिए हर बार संकट का कारण बन जाते हैं। पिछले कई महीने से संकटमोचक मंत्री कुछ न कुछ ऐसा बोल जाते हैं, जिससे बवाल हो ही जाता है। बाद में बात को गलत संदर्भ में पेश करने का आरोप लगाकर सफाई देते घूमते हैं। इस बार अलवर गए तो दो जातियों की टैलेंट की तुलना कर फंस गए। बाद में अपने चिर-परिचित अंदाज में माफी मांग ली, लेकिन डेमेज के बाद डेमेज कंट्रोल का क्या मतलब?

फील्ड पोस्टिंग के चंद महीनों में ही आईएएस को अजीब नफरत
2018 बैच के आईएएस अफसर और ब्यावर एसडीओ का एक सुझाव सियासी और प्रशासनिक हलकों में बहस का मुद्दा बन गया है। एसडीएम पद पर मिली फील्ड पोस्टिंग के कुछ महीनों में ही इन आईएएस ने निचोड़ निकाल लिया। शिकायत करने वाले गलत आरोप लगाते हैं। सुझाव दे दिया कि किसी भी शिकायत में लगाए गए आरोपों को सिद्ध करने का भार शिकायतकर्ता पर ही होना चाहिए। बाद में सफाई भी दी, लेकिन अब नए अफसर भी पहली पोस्टिंग में नेताओं की तरह के बयान देने लग जाएं, चिंता जरूरी है।

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