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समर्थन मूल्य की जगह मिले लागत के आधार पर फसल का लाभकारी मूल्य

  • भारतीय किसान संघ का जिला कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन, धानमंडी में की सभा
  • प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन
    हनुमानगढ़ (सीमा सन्देश न्यूज)।
    आगामी खरीफ फसल का लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य देने की मुख्य मांग को लेकर भारतीय किसान संघ ने बुधवार को राष्ट्रव्यापी आह्वान पर जिला कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। जिला कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन से पहले किसान संघ कार्यकतार्ओं की धानमण्डी में शैड के नीचे सभा हुई। सभा को संबोधित करते हुए भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह सूडा ने बताया कि राष्ट्रीय आह्वान पर पूरे देश के करीब 700 जिलों में जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है। धरना-प्रदर्शन करने के पीछे का मकसद है कि किसान को लागत के आधार पर फसल का लाभकारी मूल्य मिले। जबकि सरकार चाहती है कि किसान को समर्थन मूल्य दिया जाए। सरकार समर्थन मूल्य में वृद्धि नहीं करना चाहती। लेकिन किसान संघ की मांग लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य देने की है। इसके अलावा किसान संघ की ओर से धरना-प्रदर्शन के जरिए राज्य सरकार से मांग की गई है कि इंदिरा गांधी नहर परियोजना का रेग्यूलेशन जारी किया जाए। संघ के जोधपुर प्रांत के पूर्व महामंत्री विनोद धारणिया ने सरकार से आगामी खरीफ सीजन में नरमा, धान, बाजरा व मूंग की सरकारी खरीद की तुरंत व्यवस्था करने व किसान की पूरी जिन्स की खरीद समय पर खरीद करने की मांग करते हुए कहा कि डिग्गियों की सब्सिडी के लिए पूर्व में सरकार की ओर से पहले आओ पहले पाओ की व्यवस्था के तहत फार्म भरवाए गए और आॅनलाइन करवाए गए। अब जब किसानों ने डिग्गियां बना ली तो सरकार ने पैसे देते समय इसकी लॉटरी निकाल दी। भारतीय किसान संघ इसका विरोध करता है। संघ की मांग है कि पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर जिन किसानों ने डिग्गियां बना ली, जिनके पहले फार्म भरे गए उनको अनुदान जल्द से जल्द जारी किया जाए। संघ मंत्री प्रवीण लखासर ने कहा कि वे नहीं कह रहे कि सरकार किसान विरोधी है। लेकिन उनका कहना है कि किसान की जो मांग है उसे पूरा किया जाए। हमारी मांग समर्थन मूल्य से बढ़कर किसान को लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य देने की है। किसान संघ की शुरू से ही मांग रही है कि किसान को उसकी फसल का लाभकारी मूल्य मिले। अन्य वक्ताओं ने राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी ने सत्ता में आने के दस दिन बाद किसानों का कर्ज माफ करने व बुजुर्ग किसानों को पेंशन देने का वादा किया था। लेकिन करीब ढाई साल बाद भी यह वादा पूरा नहीं हुआ। सभा के बाद किसान कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए जिला कलक्ट्रेट पहुंचे तथा प्रदर्शन कर जिला कलक्टर को प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम अलग-अलग ज्ञापन सौंपे। प्रधानमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के बजाए लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य देने, एक बार घोषित मूल्य के बाद उसके आदानों में होने वाली महंगाई का भुगतान के समय समायोजन करते हुए महंगाई के अनुपात में वास्तविक मूल्य चुकाने तथा घोषित मूल्य पर किसान की उपज का बेचान सुनिश्चित करने की मांग की। वहीं मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में किसानों का कर्जा माफ करने, इंदिरा गांधी नहर परियोजना में सिंचाई रेग्यूलेशन शीघ्र जारी करने, इंदिरा गांधी नहर परियोजना में 1975 में बने पक्के खालों का पुनर्निर्माण करवाने, सिंचाई कर फ्लेट रेट करने, नोहर-भादरा क्षेत्र की नहरों में सिंचाई का पूरा पानी देने, नोहर क्षेत्र के वंचित चकबंदी का कार्य शीघ्र पूरा करने, नाली बेल्ट को राइस बेल्ट घोषित करने आदि की मांग की। इस मौके पर तहसील अध्यक्ष गोपीराम बेनीवाल, रामेश्वर सुथार, हरीश पचार, सचिन सिहाग, जयवीर गोदारा, सुरेन्द्र स्वामी, मनोहर धारणिया, पवन कुमार ज्याणी, राजेन्द्र सिहाग, पृथ्वीराज सहू, राजपाल छाबा, अनिल कुमार, भजनलाल, कुलदीप जाखड़, नरेन्द्र छिम्पा, मुकेश गोदारा, बेगराज शर्मा, कालूराम पूनिया आदि मौजूद थे।

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