सवाई माधोपुर
यह मंदिर 1579 फीट ऊंचाई पर अरावली और विंध्याचल की पहाड़ियों पर रणथम्भौर दुर्ग में त्रिनेत्र गणेश मंदिर स्थित है। यह दुनिया का एकमात्र त्रिनेत्र गणेश मंदिर है। जहां त्रिनेत्र गणेश रिद्धी-सिद्धी के साथ विराजमान हैं। इस मंदिर में गणेश चतुर्थी के दिन लक्खी मेला लगता है, फिलहाल कोरोना के चलते यहां यह मेला नहीं लग रहा है।
त्रिनेत्र गणेश मंदिर का इतिहास
अल्लाउद्दीन खिलजी ने रणथम्भौर पर आक्रमण कर दिया था। इस समय यहां के शासक हम्मीर देव थे। दुर्ग में राशन सामग्री समाप्त होने लगी तब गणेशजी ने हमीरदेव चौहान को स्वप्न में दर्शन दिए। गणेश जी उस स्थान पर पूजा करने के लिए कहा, जहां आज यह गणेशजी की प्रतिमा है। हम्मीर देव वहां पहुंचे तो उन्हे स्वयं भू-प्रकट गणेश की प्रतिमा मिली। हम्मीर देव ने फिर यहां मंदिर का निर्माण कराया। तभी से यह मंदिर स्थापित है। यह मंदिर करीब 625 साल पुराना है और सवाई माधोपुर सहित पूरे अंचल में श्रद्धा का केन्द्र है।
दुनिया भर से आते हैं न्योते और चिट्ठी
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां आने वाले न्योते हैं। घर में शुभ काम होने पर प्रथम पूज्य को निमंत्रण भेजा जाता है। रोजाना हजारों निमंत्रण पत्र और चिट्ठियां यहां डाक से पहुंचती हैं। कोरोना के कारण रणथम्भौर त्रिनेत्र गणेश मंदिर में अब चिट्ठी के साथ ही श्रद्धालु ई-मेल के जरिए भी मांगलिक कार्यक्रम के निमंत्रण भेजने लगे हैं। कोरोना काल में प्रशासन ने श्रद्धालुओं को रोका तो मंदिर ट्रस्ट ने ई-मेल सुविधा शुरू कर दी। अब श्रद्धालु ई-मेल के जरिये अपना न्योता भेजते हैं। इन सन्देशों को पुजारी भगवान को पढ़कर सुनाते हैं। यहां चिट्ठी से निमंत्रण भेजने की परंपरा सदियों पुरानी है, इसलिए इन्हें चिट्ठी वाले गणेशजी भी कहते हैं।

मेले के दौरान मंदिर के बाहर लगी भक्तों की कतार। (फाइल फोटो)
इस बार नहीं लगेगा लक्खी मेला
रणथम्भौर किले की ऊंची चोटी पर स्थित मंदिर में सदियों से हर साल गणेश चतुर्थी पर लक्खी मेला भरता है। राजस्थान में लक्खी मेला उस मेले को कहा जाता है, जहां मेले में लाखों की तादाद में लोग जुटते हैं। इस बार भी कोरोना के कारण लगातार दूसरे साल मेला नहीं भरेगा। कलेक्टर राजेन्द्र किशन ने एक सप्ताह पहले ही राजस्थान सहित यूपी, एमपी के कलेक्टर्स को पत्र भेजकर आग्रह किया है कि गणेश चतुर्थी पर मेला नहीं भरेगा। पदयात्राओं को रवाना नहीं होने दिया जाए या सीमाओं से ही लौटा दें। इसके बावजूद बाहर से कई श्रद्धालु आ रहे हैं। इन्हें मंदिर से करीब पांच किलोमीटर पहले रणथम्भौर टाइगर रिजर्व क्षेत्र के एंट्री गेट को बंद कर रोका जा रहा है। फिलहाल श्रद्धालु इसी गेट पर भोग, प्रसाद, माला चढ़ाकर धोक और दण्डवत कर रहे हैं। कलेक्टर ने कोरोना को देखते हुए 7 सितंबर से लेकर 12 सितंबर तक मंदिर में प्रवेश वर्जित कर दिया है।