नई दिल्ली
वित्त मंत्रालय 12 अक्टूबर से 2022-23 के लिए वार्षिक बजट तैयार करने की कवायद शुरू करेगा। कोविड-19 महामारी से प्रभावित भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेतों के बीच बजट की तैयारी शुरू होगी। इस बजट में डिमांड जनरेशन, रोजगार और GDP ग्रोथ जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर फोकस रहेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह चौथा बजट होगा।
12 अक्टूबर 2021 से शुरू होगा बैठकों का दौर
बजट डिविजन के बजट सर्कुलर 2022-23 के मुताबिक बजट से पहले होने वाली बैठकों का दौर यानी प्री-बजट मीटिंग 12 अक्टूबर 2021 से शुरू हो जाएंगी। वित्तीय सचिव, अन्य सचिवों और वित्तीय सलाहकारों के साथ बजट पर चर्चा पूरी करने के बाद 2022-23 के बजट अनुमान (BE) को अंतिम रूप दिया जाएगा। ये बैठकें नवंबर के दूसरे सप्ताह तक जारी रहेंगी।
सर्कुलर के मुताबिक, केंद्रीय क्षेत्र और केंद्र प्रायोजित योजनाओं समेत सभी तरह के खर्च लिमिट पर चर्चा की जाएगी। सभी तरह के खर्च और चुनिंदा योजनाओं/परियोजनाओं के लिए रिवाइज्ड एस्टीमेट 2021-22 और बजट एस्टीमेट 2022-23, राजस्व और पूंजीगत खर्च के लिए अलग से बताया जा सकता है। 2022-23 के बजट अनुमानों के लिए केंद्र सरकार के अन्य खर्चों के लिए आवंटन को अंतिम रूप दिया जाएगा।
बजट होता क्या है?
जिस तरह से हमें अपने घर को चलाने के लिए एक बजट की जरूरत होती है, उसी तरह से देश को चलाने के लिए भी बजट की जरूरत पड़ती है। हम अपने घर का जो बजट बनाते हैं, वो आमतौर पर महीनेभर का होता है। इसमें हम हिसाब-किताब लगाते हैं कि इस महीने हमने कितना खर्च किया और कितना कमाया। इसी तरह से देश का बजट भी होता है। इसमें सालभर के खर्च और कमाई का लेखा-जोखा होता है।
बजट में क्या-क्या होता है?
बजट में सरकार तीन तरह के आंकड़े बताती है। ये होते हैं- बजट एस्टिमेट यानी बजट अनुमान, रिवाइज्ड एस्टिमेट यानी संशोधित अनुमान और एक्चुअल यानी वास्तविक। अब ये तीनों क्या होते हैं, इसे समझते हैं।
1. बजट एस्टिमेटः ये अगले साल का होता है। इस बार 2021-22 के लिए बजट एस्टिमेट बताया जाएगा। यानी इसमें सरकार 2021-22 में होने वाली कमाई और खर्च का अनुमान बताती है।
2. रिवाइज्ड एस्टिमेटः ये पिछले साल का होता है। इस बार जो बजट पेश होगा, उसमें 2020-21 का रिवाइज्ड एस्टिमेट बताया जाएगा। यानी पिछले बजट में सरकार ने जो अनुमान लगाया था, उस अनुमान के हिसाब से उसकी कितनी कमाई और कितना खर्च हुआ। रिवाइज्ड एस्टिमेट बजट एस्टिमेट से कम-ज्यादा भी हो सकता है।
3. एक्चुअलः ये दो साल पहले का होता है। इस बार बजट में 2019-20 का एक्चुअल बजट बताया जाएगा। यानी 2019-20 में सरकार को असल में कितनी कमाई हुई और कितना खर्च हुआ।