अलवर
अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के कारण भारत में प्याज के मार्केट में इस बार बूम आने की संभावना थी। किसानों ने भी हजारों हेक्टेयर में प्याज बो दी। अब सितंबर माह में बारिश की कई बार झड़ी लगी रही। लगातार बारिश से अकेले अलवर जिले में करीब 250 करोड़ की प्याज की फसल में जलेबी रोग लग गया। कई जगह तो किसानों ने खड़ी खेती पर ट्रैक्टर चला दिए। मतलब प्याज को नष्ट कर दिया।
किसानों ने अब आगे की खेती की तैयारी शुरू कर दी है। प्याज की फसल में किसानों को एक बीघा में करीब 30 से 40 हजार रुपए का नुकसान है। अब जिन किसानों ने प्याज को बचा रखा है। उनको अच्छे भाव मिलने की बड़ी उम्मीद है, लेकिन के व्यापारी मान रहे हैं कि इस बार भाव सामान्य रह सकते हैं।
भाव ज्यादा तो हजारों करोड़ का फायदा
राजस्थान के प्रमुख अलवर जिले में किसानों ने प्याज की खेती में 250 करोड़ रुपए लगा दिए हैं। इस एक ही जिले में करीब 40 हजार बीघा में प्याज बोया था। भाव अच्छे मिले तो किसानों की झोली में 600 करोड़ रुपए आ सकते थे। प्रदेश और देश भर में हजारों करोड़ रुपए का फायदा हो सकता था।
अब सरसों की फसल की तैयारी
1 बीघा खेत में प्याज लगाने और पैदा होने तक करीब 65 से 70 हजार रुपए का खर्च आता है। इससे 1 से डेढ़ लाख रुपए तक की आमदनी होती है। प्याज का भाव कम रहा तो किसान कर्ज में भी दब जाएंगे। भाव अच्छे रहे तो एक बीघा के खेत में सब खर्च काटकर 70 से 80 हजार रुपए आसानी से हो जाती है। ऐसे में फसल में जलेबी रोग लगने से किसानों को बड़ा नुकसान झेलने पड़ रहा है। अब काफी किसानों ने रोग लगने के कारण प्याज को हटा दिया है। किसानों ने सरसों की फसल की तैयारी कर ली है।

अलवर शहर के पास ढहरा में प्याज की फसल पर ट्रैक्टर चलाता किसान।
यहां ज्यादा होता है प्याज
देश में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और राजस्थान में सबसे अधिक प्याज होता है। प्याज के भावों में उछाल रहता है तो इन राज्यों के किसानों को हजारों करोड़ रुपए का फायदा होता है। पिछली बार कर्नाटक में प्याज खराब होने से भाव ज्यादा बताए गए थे। इस बार अफगानिस्तान से प्याज नहीं पहुंचने की उम्मीद में ज्यादा भाव का अनुमान लगाया जा रहा है। अब प्याज के खराब होने के कारण भाव और बढ़ने की संभावना बनी है, लेकिन ज्यादा बारिश होने से अलवर के किसानों को इसका फायदा नहीं मिल सकेगा।
2019 में अफगान से आया था प्याज
साल 2019 को भारत में प्याज के भाव 100 रुपए किलो से अधिक हो गए थे। इसके बाद भारत ने अफगानिस्तान से करीब 2 हजार टन प्याज का आयात किया था। तब भाव 50 से 55 रुपए किलो आ गए थे। उस समय केंद्र सरकार ने महंगाई के मुद्दे पर यह कदम उठाया था। अब सरकार के पास अफगान से प्याज के आयात का विकल्प पहले की तरह आसान नहीं होगा। इस कारण प्याज के भाव ज्यादा रहने की संभावना है।
अफगान से इसलिए मंगाया जाता है प्याज
भारत में फसल खराब होने की स्थिति के बाद ही अफगानिस्तान से प्याज आयात किया जाता है। यह इसलिए ताकि प्याज के भाव इतने अधिक नहीं हों कि महंगाई के रूप में सरकार को घेरा जाने लगे।