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राजस्व कर्मियों ने की पेन-टूल डाउन हड़ताल, विधायक को सौंपा ज्ञापन

  • जिले में पंजीयन, प्रमाण पत्र, इंतकाल जैसे राजस्व कार्य रहे बाधित
    हनुमानगढ़ (सीमा सन्देश न्यूज)।
    राज्य सरकार की ओर से राजस्थान राजस्व सेवा परिषद् के साथ किए गए समझौते को लागू करने व सात सूत्रीय मांगों के संबंध में सोमवार को राजस्व कर्मचारियों की ओर से राजस्थान राजस्व सेवा परिषद के बैनर तले पेन व टूल डाउन हड़ताल कर विरोध दर्ज करवाया गया। हड़ताल के चलते पंजीयन, जाति प्रमाण पत्र, मूल निवास, इंतकाल सहित सभी प्रकार के अन्य राजस्व कार्य बाधित रहे। राजस्व कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध दर्ज करवाया। विरोध-प्रदर्शन के पश्चात विधायक चौधरी विनोद कुमार को मांगों के संबंध में ज्ञापन सौंपा। विधायक ने कर्मचारियों की मांगों के निस्तारण के लिए मुख्यमंत्री को अनुशंसा पत्र लिखने के लिए आश्वस्त किया। विधायक को सौंपे गए ज्ञापन में बताया कि सरकार का अपने नागरिकों-कार्मिकों के हित का संरक्षण व कल्याण प्रमुख दायित्व है। राज्य सरकार की ओर से सेवानिवृत आईएएस परमेश्वर चन्द्र की अध्यक्षता में गठित समिति ने नायब तहसीलदार के शत प्रतिशत पदों पर गिरदावर, राजस्व भू-अभिलेख निरीक्षक की पदोन्नति से नियुक्ति की अभिशंषा की है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में भी नायब तहसीलदार के स्वीकृत सभी पदों पर गिरदावर, राजस्व-भूअभिलेख निरीक्षकों की पदोन्नति करने की प्रतिबद्धता के साथ राजस्व सेवा परिषद से लिखित समझौता किया गया। राजस्थान पटवार संघ के आन्दोलन के चलते मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए निदेर्शों के बाद भी पटवारी की पांच वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण करने पर वरिष्ठ पटवारी की श्रेणी का निर्धारण कर, (एल-9) का वेतनमान दिए जाने के भी आदेश प्रसारित नहीं किए गए हैं। ज्ञापन में मांग की गई कि तहसीलदार के 68 प्रतिशत, नायब तहसीलदारों के 54 प्रतिशत एवं भू-अभिलेख निरीक्षक लगभग 20 प्रतिशत पदों पर तुरन्त पदोन्नति की जाए। अभियान के दौरान जारी किए जाने वाले पट्टों के पंजीयन की शक्तियां पूर्व की भांति उपपंजीयक के पास ही यथावत रखी जाएं। परिषद के सभी घटकों की कैडर स्ट्रेंथ में नवीन पदों का सृजन किया जाए। कोटा संभाग एवं सवाई माधोपुर के राजस्व कर्मियों के आन्दोलन अवधि के समय के असाधारण अवकाश को उपार्जित अवकाश में परिवर्तित करवाया जाए। पटवारी, भू-अभिलेख निरीक्षकों का जिले से बाहर स्थानान्तरण प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्तों के विपरीत है। परिषद के घटक संगठनों के सभी कार्मिकों के लिए स्पष्ट स्थानान्तरण नीति बनाई जाए। ज्ञापन में कहा गया कि राज्य सरकार की ओर से अपने संकल्प-प्रतिबद्धता को पूर्ण नहीं किए जाने से राजस्व सेवा परिषद सदस्य असुरक्षा-अविश्वास की भावना पैदा होने से कुंठित हैं। इसके कारण राजस्व सेवा परिषद सदस्य संविधान की ओर से प्रदत्त अधिकारों के तहत लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलनरत हैं। कर्मचारियों ने आमजन-राज्य कर्मचारियों के साथ किए गए समझौतों तथा प्रतिबद्धता को लागू कराने के साथ-साथ राजस्व परिषद के सात सूत्रीय मांगपत्र पर कार्यवाही करने की मांग की। इस मौके पर तहसीलदार बाबूलाल रेगर, नायब तहसीलदार धर्मेन्द्र जांदू, दानाराम मीणा, कानूनगो संघजिलाध्यक्ष चन्द्रभान ज्याणी, परमानंद, अजय छाबड़ा, अनिल बिश्नोई, हरबंश नैण, भरतसिंह, पटवार संघ जिलाध्यक्ष वीरेन्द्र पारीक, अनिल सहू, सुखदेव सिंह, सुखदीप सिंह, सतीश मुंजाल, विनोद राव, सुरेश चोयल, वासुदेव, कमलकांत, अमरसिंह, अमरीश जाखड़, दुर्गा रानी, दीपक गुप्ता सहित कई अन्य राजस्व कर्मचारी मौजूद थे।

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