श्रीगंगानगर।इस इलाके में किन्नू के मौसम की शुरुआत अपने साथ गिरते फल को भी लेकर आती है। इसे किसानों की ओर से पूरी तरह से बर्बाद समझा जाता है लेकिन यह गिरा हुआ फल मिट्टी, पानी, हवा, घटते भूजल, जल प्रदूषण और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार के लिए वरदान जैसा भी साबित हो सकता है। इसके इस्तेमाल से न केवल पौधों में सुधार किया जा सकता है, बल्कि यह सब्जियों, आलू और अनाज जैसी फसलों पर फफूंदनाशकों और रासायनिक स्प्रे के अंधाधुंध इस्तेमाल को भी रोकने में मदद करता है। किसान इन फलों को अपने किन्नू के खेतों से एकत्र करके कम लागत पर बायो एंजाइम तैयार कर सकते हैं। निकटवर्ती पंजाब क्षेत्र करीब 100 किसानों ने विशेष रूप से किन्नू क्षेत्र में इस बेकार फल किन्नू से बायो एंजाइम बनाना शुरू कर दिया।