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नियमों का गड़बड़झाला:सरकारी अस्पताल में कोरोना ने घेरा, इसी कारण छुट्टी लेनी पड़ी, अब न विभाग दे रहा छुट्टियों का वेतन और न ही ठेका एजेंसी

श्रीगंगानगर

कोरोना महामारी के दौरान चिकित्सा से जुड़े सभी कर्मचारियों को सरकार ने सुरक्षा कवच दिया। कोविड से प्रभावित होने पर उन्हें छुट्टियां दी गई। छुट्टियों की अवधि का वेतन दिया गया और खास बात यह कि कुछ कर्मचारियों को तो कोरोना काल में कामकाज के लिए विशेष प्रोत्साहन भी दिया गया लेकिन श्रीगंगानगर में ऐसा नहीं है। यहां चिकित्सा विभाग के लिए काम करने वाले कुछ ऐेसे कर्मचारी भी हैं, जिन्होंंने काम तो विभाग के लिए किया, इस दौरान वे कोरोना से इफेक्टेड भी हो गए। कोराना पॉजटिव होने के साथ ही विभाग ने उन्हें छुट्टी पर जाने के लिए भी कह दिया लेकिन जितने दिन वे छुट्टी पर रहे उस अवधि का वेतन उन्हें आज तक नहीं मिला। ये कर्मचारी हंै शहर के सरकारी अस्पताल में ड्यूटी कर रहे सुरक्षा गार्ड।

ये है इनकी व्यथा
सरकारी अस्पताल के गार्ड ने बताया कि उसने लक्षण महसूस होने पर पांच मई को कोरोना रिपोर्ट करवाई। इसमें सात मई को वह कोरोना पॉजिटिव पाया गया और उसी दिन से छुट्टी पर चला गया। बीस मई के लौटा लेकिन जून की शुरुआत में उन्हें जो वेतन दिया गया उसमें उस अवधि का वेतन काट लिया गया।

प्रावधान ही नहीं
ठेका कंपनी गजेंद्रा सिक्यूरिटीज को श्रीगंगानगर के सरकारी अस्पताल में सुरक्षा गार्ड लगाने का ठेका पिछले वर्ष अगस्त में दिया गया। इस कंपनी के जरिए करीब बीस कर्मचारी ठेके पर सुरक्षाकर्मी के रूप में नियुक्त किए गए। उस समय कोविड भी था लेकिन ठेके में इस संबंध में कोई प्रावधान नहीं किया गया। ऐसे में अब न तो सुरक्षा एजेंसी यह मान रही है कि इन कर्मचारियों को भुगतान की जिम्मेदारी उनकी है और न ही सरकार इस बारे में कोई गंभीरता दिखा रही है। सुरक्षा एजेंसी कहना है कि पीएमओ उन्हें इन कर्मचारियों की इस अवधि की हाजिरी दे दे तो वे भुगतान को तैयार है वहीं पीएमओ का कहना है कि ठेके के दौरान ऐसा कोई प्रावधान रखा ही नहीं गया।

हमारे पास व्यवस्था नहीं
गजेंद्रा सिक्यूरिटीज के संचालक जसवंतसिंह भाटी का कहना है कि हमें जितने दिन की हाजिरी मिलेगी, हम उतना ही भुगतान करेेंगे। जब ठेका हुआ तो कोविड के हालात पर किसी का ध्यान नहीं गया। ऐसे में ऐसा कोई प्रावधान रखा ही नहीं गया तो भुगतान कैसे करें।

एनएचएम को लिखा है
पीएमओ डॉ.बलदेवसिंह कर्मचारियों की व्यथा को सही तो मानते हैं लेकिन उनका कहना है कि प्रावधान नहीं होने के कारण वे कुछ कर नहीं सकते। उन्होंने बताया कि इस संबंध में एनएचएम को लिखा गया है जिसके जरिए इन कार्मिकों का ठेका किया गया था।

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