दिल्ली
पिछले एक साल में जितनी चर्चा क्वॉड की हुई है, उतनी किसी दूसरे संगठन की नहीं हुई. क्या यह संगठन सिर्फ चीन को काबू करने का जरिया है या अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कुछ बड़ा घट रहा है?अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत का 2006 में बना संगठन क्वॉड यानी क्वॉड्रिलेटरल सिक्यॉरिटी डायलॉग जब 2017 में अचानक फिर से सक्रिय हो गया, तो चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने इसका मजाक उड़ाते हुए कहा था कि यह “सुर्खियां बटोरने का तरीका है जो समुद्र की झाग की तरह गायब हो जाएगा.” बीते चार साल में प्रशांत महासागर की लहरों से जाने कितना झाग गायब हो चुका है लेकिन क्वॉड ना सिर्फ मजबूती से खड़ा है बल्कि हाल के सालों में सबसे ज्यादा तेजी से उभरने वाला संगठन बन गया है. दक्षिण-पूर्व एशिया के जिन देशों ने इस संगठन को लेकर पहले असहजता दिखाई थी, मेलबर्न में क्वॉड के विदेश मंत्रियों की सालाना बैठक में उन्हें इस संगठन से जोड़ने पर भी बात हुई. चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच तनाव और हथियारों की होड़ का नया दौर पिछले एक साल में इस संगठन के नेता कई बार मिल चुके हैं, जिसमें से दो बार तो आमने-सामने मुलाकात हुई है. पहले पिछले साल चारों देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने अमेरिका में बैठक की थी और अब चारों विदेश मंत्री ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में मिले, जो इस संगठन की लगातार बढ़ती अहमियत का एक और संकेत था. भारत के थिंक टैंक दिल्ली पॉलिसी ग्रुप में बतौर रिसर्च एसोसिएट काम कर रहीं डॉ. आंगना गुहा रॉय कहती हैं कि क्वॉड दुनियाभर के लिए अच्छा है. डीडब्ल्यू से बातचीत में उन्होंने कहा, “क्वॉड ग्लोबल गुड के लिए अच्छा है. इसका उद्देश्य संरचनात्मक है, सकारात्मक है, जो क्लाइमेट चेंज, वैक्सीन और तकनीक जैसे समकालीन मुद्दों से जुड़ा है.” क्वॉड नेताओं की मेलबर्न बैठक शुक्रवार को मेलबर्न में जब में अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन, जापान के योशीमासा हयाशी, ऑस्ट्रेलिया की मरीस पाएन और भारत के डॉ. एस. जयशंकर मिले तो इन्ही सब मुद्दों पर चर्चा हुई. चारों देशों ने साइबर सुरक्षा को गंभीरता से लेने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आपदाओं के प्रबंधन वह बचाव कार्यों में सहयोग बढ़ाने जैसे मुद्दों पर बात की. ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मरीस पाएन ने पत्रकारों से बातचीत में बताया, “हमने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सहयोगियों के लिए जल-सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने और मछलियों का अवैध शिकार रोकने जैसे मुद्दों पर चर्चा की.” मरीस पाएन ने कहा कि कोविड महामारी के खिलाफ संगठन का सहयोग ‘सबसे महत्वपूर्ण रहा.' लेकिन इन सब मुद्दों के बीच में उन विषयों पर भी चर्चा हुई जिन्हें लेकर चीन और रूस जैसे देश इस संगठन से नाखुश हैं.