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‘सरकारी आवास खाली करो:’ दिल्ली हाईकोर्ट का रिटायर्ड कश्मीरी अधिकारियों को आदेश

नई दिल्ली

दिल्ली उच्च न्यायालय ने तीन सेवानिवृत्त अधिकारियों द्वारा केंद्र सरकार के दावों का खंडन करने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ताओं ने कश्मीरी प्रवासी होने का दावा करते हुए सरकारी आवास को बनाए रखने की अनुमति मांगी थी। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा जारी बेदखली के आदेश को चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव ने याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा, “याचिका सुनने लायक नहीं है, इसे खारिज किया जाता है।

पीठ ने निर्देश दिया, “याचिकाकर्ता 31 मार्च, 2022 को या उससे पहले उन्हें आवंटित सरकारी आवास खाली कर देंगे और एक सप्ताह के भीतर अदालत में एक शपथ दायर की जाएगी।” उच्च न्यायालय ने हाल के एक आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं के वकीलों द्वारा दी गई दलील कि वे तीन साल के लिए घर में रहने के लाभ के हकदार हैं, निराधार हैं।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता 28 मार्च, 2017 के कार्यालय ज्ञापन के तहत अपात्र होने के कारण 7 अक्टूबर 2021 के आदेश पर भरोसा नहीं कर सकते, क्योंकि वे इस योजना के तहत कवर नहीं थे, और ऐसे में सरकारी आवास रखने के हकदार नहीं थे। पीठ ने स्पष्ट किया कि जो योजना प्रासंगिक समय पर लागू थी, उस पर विचार किया गया था कि वही केंद्र सरकार के उन कर्मचारियों पर लागू होगी, जो प्रासंगिक समय पर श्रीनगर में तैनात थे और केंद्र सरकार द्वारा 1 नवंबर 1989 के बाद सुरक्षा के आधार पर श्रीनगर से दिल्ली के लिए स्थानांतरित कर दिए गए थे।