नई दिल्ली
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी इजाफा हो सकता है। दरअसल, यूक्रेन टेंशन से कच्चे तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में 105 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंचा है। बावजूद घरेलू मार्केट में पिछले तीन महीने से ईंधन के रेट स्थिर हैं। इसके चलते तेल कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है। इस बात की जानकारी भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की आर्थिक रिपोर्ट में दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी को देखते हुए डीजल और पेट्रोल की कीमतों में 7-14 रुपये की बढ़ोतरी होनी चाहिए थी, जो कि नहीं हुई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूरोप में बढ़ते भू-राजनीतिक टेंशन से इस वित्तीय वर्ष में भारत को कम से कम 1 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा।
रिपोर्ट में क्या कहा गया?
रिपोर्ट में कहा गया है, “मौजूदा वैट ढांचे के आधार पर ब्रेंट क्रूड की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल से 110 डॉलर प्रति बैरल तक ले जाने से डीजल और पेट्रोल की कीमतें 7-14 रुपये अधिक होनी चाहिए थीं।” जैसा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को यूक्रेन में सैन्य अभियान शुरू किया, ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 2014 के बाद पहली बार 105 डाॅलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं।
हालांकि, यह शुक्रवार को गिरकर 101 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया लेकिन यह भारत की मुद्रास्फीति और चालू खाता घाटे के लिए खतरा बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों को उच्चतम स्तर से 67 फीसदी तक नीचे आने में करीब 18 महीने लगेंगे। कच्चे तेल के भारतीय बास्केट की औसत कीमत अप्रैल 2021 में 63.4 डॉलर प्रति बैरल से 33.5% बढ़कर जनवरी 2022 में 84.67 डॉलर प्रति बैरल हो गई है।