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मणिपुर चुनाव में पर्यावरण कैसे बना सबसे अहम मुद्दा?

दिल्ली

भारत में राजनीतिक दलों के घोषणापत्रों में अमूमन पर्यावरण जैसे संवेदनशील मुद्दों को जगह कम ही मिलती है. लेकिन पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर इस मामले में अपवाद साबित हुआ है.मणिपुर जैसे छोटे-से पर्वतीय राज्य में सत्तारूढ़ बीजेपी से लेकर कांग्रेस और बाकी तमाम क्षेत्रीय दलों तक ने न सिर्फ पर्यावरण के मुद्दे को अपने घोषणापत्र में जगह दी है बल्कि चुनाव अभियान के दौरान भी जोर-शोर से इस मुद्दे को उठाते रहे हैं. राज्य के 60 विधानसभा सीटों में पहले दौर में 38 सीटों पर मतदान हो चुका है. दूसरे दौर में बाकी 22 सीटों के लिए पांच मार्च को मतदान हो रहा है. घोषणापत्रों में छाया लोकटक लेक पूर्वोत्तर भारत में मीठे पानी की सबसे बड़ी लोकटक लेक में दुनिया का अकेला तैरता हुआ केबुल लामजाओ नेशनल पार्क और लुप्तप्राय संगाई हिरण भी रहते हैं. संगाई हिरण मणिपुर का राजकीय पशु है. अपने किस्म के इस अनूठे लेक में जगह-जगह द्वीप और घर बने हुए हैं. हजारों लोग मछली पालन के जरिए पीढ़ियों से अपनी आजीविका चलाते रहे हैं. मणिपुर में सत्ता के दावेदार तमाम राजनीतिक दलों ने लोकटक लेक के विकास, वहां ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने, पर्यावरण की सुरक्षा और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने को अपने घोषणापत्र में प्रमुखता से जगह दी है. केंद्र सरकार भी इनलैंड वाटरवेज प्रोजेक्ट के लिए लोकटक लेक पर ध्यान दे रही है.