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रोटी की खातिर कब तक परदेश में मरते रहेंगे बिहारी!

दिल्ली

बिहार दिवस आयोजन के 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि तेलंगाना में बिहार के 11 मजदूर एक हादसे में मारे गए. यह अपनी तरह की पहली घटना तो नहीं है, पर क्या यह आखिरी होगी!तीन दिन पहले, 22 मार्च को बिहार के गौरवशाली अतीत को याद करते हुए और वर्तमान को समृद्धशाली बनाने की प्रतिज्ञा के साथ धूमधाम से बिहार दिवस मनाया गया. लेकिन, इस धूम-धड़ाके के 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि बिहार से सैकड़ों किलोमीटर दूर तेलंगाना (हैदराबाद) में कबाड़ के एक गोदाम में आग लगने की एक घटना में बिहार के सारण और कटिहार जिले के 11 मजदूरों की मौत हो गई. ये मजदूर गोदाम में काम करते थे और गोदाम के ऊपर बने कमरे में रहते थे. इसी दिन देर रात उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के विजयनगर इलाके में नाला खुदाई के दौरान एक स्कूल की दीवार गिरने से तीन मजदूर काल के गाल में समा गए. ये सभी अररिया जिले के जोकीहाट के रहने वाले थे. इन मजदूरों में कोई घर बनाने के लिए पैसे जुटाने की तमन्ना के साथ, तो कोई बहन के हाथ पीले करने के लिए पैसे कमाने के लिए परदेस गया था. इन सब की हसरतें तो अधूरी रह ही गईं, अब वे अपनों का मुंह भी नहीं देख पाएंगे. ऐसा नहीं है कि राज्य के बाहर कामगारों की मौत की यह पहली घटना है. दूसरे प्रदेशों में बिहारी मजदूरों की मौत की खबरें अक्सर आती हैं. हर ऐसी घटना के बाद गम जताया जाता है और मुआवजे का एलान होता है. एक-दो दिन सोशल मीडिया पर शोक संदेश तैरते हैं. धीरे-धीरे इन मजदूरों की मौत की असली वजह बेरोजगारी और पलायन को भुला दिया जाता है. कुछ दिनों बाद फिर ऐसी ही घटना होती है और फिर शोक और मुआवजे का सिलसिला शुरू हो जाता है. आखिर बिहार के कामगार रोजी-रोटी की खातिर परदेश में कब तक मरते रहेंगे? क्या यही इनकी नियति बन गई है? लंबी है मामलों की फेहरिस्त इससे पहले बीते फरवरी माह में महाराष्ट्र के पुणे में एक निर्माणाधीन मॉल में लोहे की जाली गिरने से कटिहार जिले के पांच मजदूरों की जान चली गई. इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुख जताया था. पुणे में ही जून, 2019 में हुई एक अन्य घटना में बिहार के 15 मजदूरों की मौत हो गई थी. पिछले साल अक्टूबर में जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों ने बिहार के मजदूरों को मौत के घाट उतार दिया था. इसी माह उत्तराखंड के नैनीताल में हुए एक हादसे में पश्चिम चंपारण जिले के नौ श्रमिकों की मौत हो गई थी. यह भी पढ़ें: बिहार में ‘रहस्यमय’ तरीके से लगातार हो रही मौत इन घटनाओं के अलावा रोजगार की खोज में दूसरे राज्यों में जाने के दौरान भी ये मजदूर सड़क हादसों के शिकार होते रहते हैं. ऐसी ही एक घटना अगस्त, 2021 की है, जब महाराष्ट्र में बिहार और उत्तर प्रदेश के 12 मजदूरों की जान चली गई थी.