जयपुर
राजस्थान के कोटा जिले में देवा गुर्जर की हत्या के बाद लोगों में दहशत फैली हुई है। पुलिस को देवा गुर्जर की हत्या के बाद उपजे गुस्से से गैंगवार की आशंका है। राजस्थान में आए दिन हो रही गैंगवार की घटनाओं ने पुलिस के साथ-साथ लोगों की नाक में भी दम कर रखा है। पूर्वी राजस्थान, हाड़ौती अंचल, शेखावटी अंचल और मारवाड़ में करीब एक दर्जन से अधिक- छोटे-बड़े गिरोह पुलिस के लिए सिरदर्द बने है। हालांकि, पुलिस ने ज्यादातर गैंगस्टर को सलाखों के पीछे डाल दिया है। वहीं कुछ गैंगस्टर पुलिस एनकाउंटर में मारे भी जा चुके हैं। संपत नेहरा गैंग, लाॅरेंस बिश्नोई गैंग, विशनाराम गैंग और लाला कोडिया गैंग अपने गुर्गों के माध्यम से संगीन अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। गैंगस्टर आनंदपाल की मौत के बाद राजस्थान में फिर से गैंगवार पनप रही है।
जीवनराम की हत्या कर आनंदपाल सिंह बना गैंगस्टर
7 हत्या समेत कुल 40 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज थे। यह अन्य गैंगस्टरों से कई मामलों में अलग था। विधि स्नातक और बीएड होने के बावजूद ना सिर्फ जुर्म का रास्ता चुना बल्कि उस पर राज किया। बीएड की पढ़ाई करते-करते इस पर सियासत का भूत सवार हो गया। निर्दलीय उम्मीदवार को तौर पर प्रधान के चुनाव में उतर गया। इस चुनाव में आनंदपाल सिंह सिर्फ 2 वोटों से हार गया। सियासत करते-करते आनंदपाल शराब तस्तरी के धंधे में भी उतर गया और इसी के साथ अपराध की दुनिया में कदम रख दिया। जीवनराम की हत्या आनंदपाल द्वारा किया गया पहला कत्ल था। दरअसल, जीवनराम ने मदन सिंह की निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी। देखते ही देखते यह मामला जाट बनाम राजपूत का हो गया था। राजपूतों का मान बचाने के लिए आनंदपाल ने जीवनराम की हत्या कर दी। इस हत्या के बाद आनंदपाल नहीं रुक और एक बाद एक कई वारदातों को अंजाम दिया। इसी बीच पुलिस ने आनंदपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया। मगर सितंबर 2015 में पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। 21 महीनों तक फरार होने के बाद जून 2017 में पुलिस ने एक एनकाउंटर में आनंदपाल सिंह को मार गिराया।