हनुमानगढ़. इंदिरागांधी नहर में सिंचाई पानी की समस्या से जूझ रहे कई किसान अब घग्घर नदी में पानी आने की बाट जोह रहे हैं। इस नदी में पानी की आवक होने पर किसान खरीफ फसलों की बिजाई कर सकेंगे। वहीं मानसून सक्रिय हुआ तो 29 जून के बाद कभी भी घग्घर नदी में पानी का प्रवाह शुरू हो सकता है। नदी में निर्बाध रूप से पानी का प्रवाह होता रहे, इसके लिए अवैध बंधों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसे लेकर घग्घर डिविजन कार्यालय की ओर से संबंधित खंड को निर्देशित कर दिया गया है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार राजस्थान क्षेत्र में हरियाणा के ओटू हैड से पानी प्रवाहित होता है। ओटू हैड का लेवल वर्तमान में ६४३ फीट है। यहां का लेवल ६४८ फीट होने के बाद राजस्थान क्षेत्र में पानी प्रवाहित होगा। वर्तमान में घग्घर नदी में पानी का प्रवाह शुरू होता है तो किसान धान की बिजाई में जुट जाएंगे। घग्घर बेल्ट में होने वाली धान की फसल की गुणवत्ता भी काफी अच्छी मानी जाती है। इसलिए इसकी मांग देश व विदेशों में खूब होती है। घग्घर बाढ़ नियंत्रण को लेकर भी स्थानीय स्तर पर तैयारी शुरू कर दी गई है। माइक्रो प्लान बनाकर इसे स्वीकृत करवा लिया गया है। कंट्रोल रूम का संचालन भी शुरू कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार किसी समय सरस्वती के नाम से प्रवाहित होने वाली इस नदी का बहाव क्षेत्र अब काफी सिकुड़ गया है। इसलिए लोग इसे घग्घर नाली बेड के नाम से पुकारने लगे हैं। घग्घर की हालत यह है कि लगातार बढ़ते अतिक्रमण के चलते बहाव क्षेत्र कुछ जगह आधा बीघा से भी कम हो गया है। ऐसे में उद्गम स्थल के आसपास पानी की मात्रा बढऩे पर हमारे आसपास में बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है। नदी का रास्ता रोकने पर हनुमानगढ़ के लोग वर्ष १९९५ में नदी का गुस्सा भी देख चुके हैं।
३५ हजार हेक्टेयर में बिजाई का लक्ष्य
हनुमानगढ़ जिले में चालू खरीफ सीजन में ३५ हजार हेक्टेयर में धान की बिजाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कृषि विभाग के अधिकारी लक्ष्य के अनुसार बिजाई करवाने के प्रयास में हैं। कृषि विभाग के उप निदेशक दानाराम के अनुसार प्रति वर्ष औसतन ३५ से ३६ हजार हेक्टेयर में धान की बिजाई होती है। इसमें ज्यादातर बिजाई घग्घर नदी के आसपास ही होती है। इस नदी में पानी की आवक होते ही किसान बिजाई में जुट जाते हैं।
यहां से आता पानी
हिमाचल, पंजाब व हरियाणा के आसपास शिवालिक की पहाडिय़ों से घग्घर में पानी का प्रवाह होता है। काफी मात्रा में हरियाणा के ओटू हैड पर पानी का भंडारण कर लिया जाता है। बाद में राजस्थान में पानी छोड़ा जाता है। इसके बाद अनूपगढ़ के रास्ते घग्घर का पानी पाकिस्तान जाता है। अनूपगढ़ के रास्ते ही पानी पाक सीमा स्थित भेड़ताल पर पहुंचता है। घग्घर का आगमन हिमाचल प्रदेश के शिमला के पास शिवालिक पहाडिय़ों के पास से माना जाता है।
जीडीपी को सहारा
कोरोना काल में राज्य सरकार की आर्थिक सेहत बिगडऩे पर प्रकृति ने आर्थिक तौर पर सहारा दिया। वित्तीय वर्ष में घग्घर में पानी की ठीक आवक के चलते वर्ष २०२०-२१ के लिए विभाग को एक करोड़ ७२ लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। सरकारी खजाने में इस राशि के जमा होने से सरकार को आर्थिक स्तर पर काफी संबल मिला। विभाग की ओर से अनुबंधित फर्म नदी व नहरों के अधिकृत क्षेत्रों में १६ अगस्त २०२० से ३१ मार्च २०२१ तक मछली उत्पादन करेगी। इसकी एवज में सरकार के खाते में एक करोड़ ७२ लाख रुपए का जमा हुआ है। इससे जिले की जीडीपी को सहारा मिला है।
……वर्जन….
ओटू हैड से हमें मिलता पानी .
घग्घर नदी में हरियाणा के ओटू हैड से राजस्थान क्षेत्र में पानी प्रवाहित होता है। अभी घग्घर के जल ग्रहण क्षेत्रों में बारिश शुरू नहीं हुई है। २९ जून के बाद मानसून के सक्रिय होने पर इसमें आवक शुरू हो सकती है। अवैध बंधों को हटाने के लिए संबंधितों को निर्देशित कर दिया गया है। ताकि पानी का प्रवाह सुचारू रूप से होता रहे।
-प्रदीप बंसल, अधिशाषी अभियंता, घग्घर बाढ़ नियंत्रण एवं ड्रेनेज खंड हनुमानगढ़
दो दशक में (घग्घर)नाली बेड में चले अधिकतम पानी पर नजर
वर्ष पानी
२००० ५०००
२००१ ५०००
२००२ ३८००
२००३ ३९००
२००४ ५०००
२००५ ३०००
२००६ ३०००
२००७ ३०००
२००८ ४५००
२००९ ४०००
२०१० ५०००
२०११ ३०००
२०१२ ३०००
२०१३ ४०००
२०१४ १८००
२०१५ ४०००
२०१६ ३०००
२०१७ २४००
२०१८ ४७००
२०१९ ५०००
२०२० ३०००
(हनुमानगढ़ क्षेत्र में घग्घर के नाली बेड में वर्षवार चले पानी को क्यूसेक मेें समझें।)