उदयपुर।
शिक्षा और स्वास्थ्य की पहली सीढ़ी कहे जाने वाले आंगनबाड़ी केंद्र बदहाल होते जा रहे हैं। सिस्टम की बेरुखी की वजह से इस महत्वपूर्ण व्यवस्था की तस्वीर बेहद धुंधली होती जा रही है। कई केंद्रों पर बिजली-पानी तक की व्यवस्था नहीं हैं तो कई किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं। 45 डिग्री तापमान के बीच इन आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों के लिए पोषाहार तक नहीं पहुंच रहा है।
राजस्थान के उदयपुर जिले की ही बात करें तो यहां 3175 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिनमें से 1057 केंद्रों के पास अपने भवन नहीं है। भवन के लिए लंबे समय से प्रशासनिक स्तर पर कवायद चल रही है, लेकिन अब तक जमीन ही आवंटित नहीं हुई है। इन केंद्रों पर संसाधन से लेकर पोषाहार तक की समस्याएं हैं। अब सुविधाएं नहीं होने से बच्चों की पंजीकृत संख्या में भी लगातार गिरावट आ रही है। गर्भवती महिलाएं भी यहां आ रही हैं। आदिवासी क्षेत्र के दूरदराज इलाकों में इन केंद्रों की हालत और भी ज्यादा खराब है। अधिकांश समय तो यहां ताले ही लगे रहते हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन के लिए सरकार को पत्र लिख चुका है, लेकिन इसका नतीजा अब तक सिफर ही रहा है। संभाग के प्रतापगढ़ जिले में 170 केंद्र सरकारी स्कूलों में व 140 केंद्र किराये के भवनों में संचालित हो रहे हैं। इसी तरह डूंगरपुर जिले में 479 केंद्र स्कूलों व 244 केंद्र किराये के भवनों में चल रहे हैं।