एक गुट कर रहा विरोध तो दूसरा समर्थन
जयपुर. राजस्थान सरपंच संघ की ओर से राजधानी जयपुर में आज से पंचायती राज मंत्री के खिलाफ महापड़ाव शुरू कर दिया है। महापड़ाव में शामिल हो रहे सरपंच, उप सरपंच और वार्ड पंचों की मांग है कि रमेश मीणा को मंत्री पद से हटाया जाए। जब तक सरकार उन्हें मंत्री पद से नहीं हटाएगी। तब तक महापड़ाव जारी रखने का ऐलान किया है। बाड़मेर, नागौर सहित 7 जिलों में पंचायती राज विभाग की ओर से करवाए जा रहे विकास कार्यों में भ्रष्टाचार सामने आने पर मंत्री ने भुगतान रोककर जांच शुरू करवाई। इसके विरोध में सरपंचों ने मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
प्रदेश के सरपंच, उप सरपंच, वार्ड पंच, प्रधान और उप प्रधान दो गुटों में बंट गए हैं। पहला गुट राजस्थान सरपंच संघ के प्रदेशाध्यक्ष भंवरलाल जांगू का है जो पंचायती राज मंत्री रमेश मीणा का विरोध कर रहे हैं। दूसरा गुट राजस्थान सरपंच संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष नेमीचंद मीणा का है जो मंत्री रमेश मीणा के समर्थन में है।
सरपंच संघ के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष भी आमने-सामने हो गए हैं। दोनों ही गुटों की ओर से जयपुर में धरने शुरू कर दिए गए हैं। विरोध करने वाले सरपंच मानसरोवर के न्यू सांगानेर रोड स्थित एक होटल के पीछे प्लॉट में एकत्रित हुए हैं। वहीं मंत्री का समर्थन करने वाले सरपंच भी मानसरोवर के न्यू सांगानेर रोड स्थित ओशियन पैलेस मैरिज गार्डन में जुटे हुए हैं।
मंत्री के विरोध में महापड़ाव डालने वाले सरपंच संघ के अध्यक्ष भंवरलाल जांगू ने निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मंत्री ने बिना जांच के ही सरपंचों पर करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगा दिया। इससे प्रदेश के सरपंच आहत हैं। जांगू का कहना है कि मंत्री की ओर से एक एनजीओ के मार्फत घर-घर सर्वे करा कर जांच करवाई जा रही है। यह तरीका गलत है। ग्रामीण क्षेत्रों की अधिकतर महिलाओं को विकास योजनाओं और भुगतान के बारे में जानकारी नहीं है। राजनैतिक दुर्भावना के कारण एनजीओ की ओर से किए जा रहे सर्वे से सरपंचों के खिलाफ माहौल बन रहा है।
पंचायती राज मंत्री रमेश मीणा ने पिछले दिनों नागौर और बाड़मेर जिलों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कुछ ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों की हकीकत जानने के लिए फील्ड में भी गए। जिन विकास कार्यों को कागजों में पूरा होना दिखा कर लाखों रुपये का भुगतान उठाया जा चुका था, मौके पर उसका कोई काम हुआ ही नहीं था। ऐसे में मंत्री ने आगामी भुगतान रोककर भ्रष्टाचार की जांच के आदेश दिए। मंत्री रमेश मीणा का कहना है कि मनरेगा में जिस कार्य के लिए पैसे उठा लिए गए हैं। धरातल पर वह काम हुआ ही नहीं। नागौर में 354 करोड़ रुपए और बाड़मेर में 519 करोड़ रुपये के विकास कार्य करवाए लेकिन मौके पर ये काम मिले ही नहीं।