नयी दिल्ली (वार्ता). सरकारी क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2014-15 से 6.42 लाख करोड़ रुपये के अवरुद्ध ऋण (एनपीए) और भट्टे खाते में डाले गए ऋणों की वसूली की है। इस दौरान बैंकों ने जानबूझ कर ऋण न चुकाने वाले 98.5 प्रतिशत लोगों के खिलाफ वसूली की कार्रवाई शुरू की है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आईटी प्रकोष्ठ के संयोजक अमित मालवीय ने ट्विटर पर सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा बैंकों ने 5.17 लाख करोड़ रुपये के अवरुद्ध ऋण और 1.24 लाख करोड़ रुपये के भट्टे खाते में डाले गए ऋणों की वसूली की है।
सरकारी बैंकों का मार्च 2022 के अंत तक प्रावधान कवरेज अनुपात (अवरुद्ध ऋणों के विरुद्ध पूंजी प्रावधान) सुधरकर 86.9 प्रतिशत हो गया जो मार्च 2015 में 46 प्रतिशत था। प्रावधान कवरेज अनुपात के माध्यम बैंक के वित्तीय स्वास्थ का पता लगाया जाता है।
बैंकों का सकल एनपीए अनुपात 31 मार्च, 2022 को सुधरकर 7.4 प्रतिशत रहा जो 31 मार्च, 2018 को 14.6 प्रतिशत था। इस अवधि में बैंकों का शुद्ध एनपीए आठ प्रतिशत से घटकर दो प्रतिशत पर आ गया।
सार्वजनिक क्षेत्रो के बैंकों ने आठ वर्षों की अवधि में सबसे अधिक वित्त वर्ष 2018-19 में कुल 1,21,076 करोड़ रुपये वसूले।
आंकड़ों के अनुसार बैंकों ने जान-बूझकर ऋण न चुकाने वाले 12,265 लोगों में 12,076 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की शुरूआत की है।
वित्त वर्ष 2015-16 से वित्त वर्ष 2020-21 के बीच सरकार ने बैंकों में 3.36 लाख करोड़ रुपये की पूंजी डाली है जबकि इन सार्वजनिक बैंकों ने 2.99 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि बाजार से जुटायी है।