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2 घंटे से फिरोजपुर एसएसपी को पता था, फिर भी फ्लाईओवर पर फंसा पीएम का काफिला… सुप्रीम कोर्ट कमेटी की आई रिपोर्ट

नई दिल्ली. इसी साल 5 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब के फिरोजपुर में रैली करने जा रहे थे, लेकिन एक फ्लाईओवर पर उनका काफिला फंस गया। तस्वीरें सामने आईं तब लोगों को समझ में आया कि पीएम की सुरक्षा में यह कितनी बड़ी चूक थी। केंद्र ने रिपोर्ट तलब की, पंजाब सरकार अपनी बात कहती रही लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। अब रउ की ओर से गठित समिति ने बताया है कि फिरोजपुर के ररढ पर्याप्त सुरक्षा बल होने के बाद भी ठीक तरह से व्यवस्था नहीं कर सके। दरअसल, पीएम की सुरक्षा या कहिए उनके दौरे को लेकर एक प्रोटोकॉल होता है जिसका पालन किया जाता है। एक ह्यब्लू बुकह्ण होती है जिसमें सुरक्षा से संबंधित दिशानिर्देश दिए गए होते हैं। इसमें श्श्कढ की सुरक्षा को लेकर नियमों का ब्यौरा होता है। इस ह्यब्लू बुकह्ण में राज्य के अधिकारियों द्वारा प्रधानमंत्री की पूरी तरह सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या करना है, इसकी एक स्पष्ट और विस्तृत प्रक्रिया होती है। लेकिन उस दिन पंजाब के उस फ्लाईओवर पर सब नियम कानून ताक पर रख दिए गए।
प्रदर्शनकारियों ने आगे रास्ता रोक रखा था, ऐसे में कुछ देर इंतजार करने के बाद पीएम किसी भी कार्यक्रम में शामिल हुए बगैर दिल्ली लौट आए। उस दिन पीएम का काफिला फ्लाईओवर पर करीब 20 मिनट तक फंसा रहा था। हालात को संभालने के लिए पीएम की सुरक्षा में लगे एसपीजी कमांडोज ने पूरे समय तक पोजीशन ले रखी थी। देशभर में यह मामला सुर्खियों में रहा। हाल के दशकों में ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया जब पीएम का काफिला फंस गया हो और उनकी सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो गया हो। सुप्रीम कोर्ट में कमेटी ने सुझाव दिया है कि एक निगरानी समिति होनी चाहिए जो प्रधानमंत्री की सुरक्षा में लगे पुलिस अधिकारियों के लिए संवेदनशीलता, सुरक्षा पाठ्यक्रम और ह्यब्लू बुकह्ण की समय-समय पर समीक्षा करे और उसे अपडेट करे।
इस कमेटी में पांच लोग शामिल थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि एसएसपी के पास पर्याप्त समय था। पंजाब के तत्कालीन अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजीपी) जी. नागेश्वर राव ने उन्हें सूचित किया कि प्रधानमंत्री आकस्मिक मार्ग से जाएंगे लेकिन उनके निर्देश पर भी वह कार्रवाई करने में फेल रहे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह शीर्ष अदालत की पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा की अगुआई वाली पांच सदस्यीय समिति की रिपोर्ट को उचित कार्रवाई के लिए सरकार के पास भेजेगा। चीफ जस्टिस एन. वी. रमण, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने समिति की रिपोर्ट को पढ़ते हुए कहा, ‘फिरोजपुर के एसएसपी अवनीत हंस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में विफल रहे। पर्याप्त बल उपलब्ध होने के बावजूद और प्रधानमंत्री के मार्ग पर प्रवेश की सूचना दो घंटे पहले देने के बावजूद वह ऐसा करने में विफल रहे।’
पीठ ने रिपोर्ट पढ़ते हुए कहा, ‘पर्याप्त सुरक्षा बल उपलब्ध होने के बावजूद वह ऐसा करने में विफल रहे जबकि उन्हें दो घंटे पहले सूचित किया गया था कि प्रधानमंत्री उस मार्ग से गुजरेंगे।’ समिति ने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कुछ उपायों की भी पहचान की है।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री मोदी की पंजाब यात्रा के दौरान सुरक्षा में हुई चूक की जांच के लिए 12 जनवरी को शीर्ष अदालत की पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की थी। कोर्ट ने कहा था कि सवालों को एकतरफा जांच पर नहीं छोड़ा जा सकता और न्यायिक क्षेत्र के व्यक्ति द्वारा इसे देखे जाने की आवश्यकता है। इस मामले में केंद्र और पंजाब सरकार के आदेश पर अलग-अलग जांच को रोकते हुए पीठ ने कहा था कि सुरक्षा चूक पर किसी पार्टी ने गंभीरता से सवाल नहीं उठाया है और स्वतंत्र जांच जरूरी है क्योंकि दोनों सरकारों के बीच कहासुनी से कोई हल नहीं निकलेगा, बल्कि इस पर एक मजबूत प्रणाली की जरूरत है।
पीठ ने न्यायमूर्ति मल्होत्रा के अलावा ठकअ के महानिदेशक या उनके प्रतिनिधि (जो पुलिस महानिरीक्षक से नीचे की रैंक के नहीं हों), चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशक और पंजाब के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सुरक्षा) को समिति का सदस्य बनाया था। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी इसमें सदस्य बनाया गया था। समिति को भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए संवैधानिक पदाधिकारियों की सुरक्षा पर सुझाव या सिफारिश देने का काम सौंपा गया था। शीर्ष अदालत का यह आदेश एक संगठन ह्यलॉयर्स वॉयसह्ण की याचिका पर आया, जिसमें पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक की जांच किए जाने का अनुरोध किया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में ऐसी कोई घटना न हो।
बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने उस दिन ड्यूटी पर तैनात एसपीजी कमांडो, पंजाब पुलिस के जवानों और आसपास के लोगों के भी बयान दर्ज किए। उस समय के वीडियो भी देखे गए जिसमें पीएम कार में बैठे दिखते हैं और कुछ दूरी पर प्रदर्शनकारी सड़क को रोके हुए थे।