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राहुल गांधी-प्रियंका गांधी के ‘जादूगर अंकल’ CM गहलोत की अनसुनी कहानियां

जयपुर

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सियासी किस्से चर्चित रहे हैं। गहलोत के करीबी अशोक गहलोत का राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से जुड़ा पुराना किस्सा बताते हैं। गहलोत इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से मिलने कभी-कभी दिल्ली आया करते थे। तब गहलोत को लंबा इंतजार करना पड़ता था। तब राहुल और प्रियंका गांधी दोनों को ताश के पत्तों के साथ जादू दिखाया करते थे। दोनों ने अशोक गहलोत को नया नाम दिया था ‘जादूगर अंकल’। पिछले गुजराता विधानसभा चुनाव में सीएम गहलोत ने ऐसा जादू दिखाया कि भाजपा को  किनारे पर आकर जीत मिली। राज्यसभा चुनाव से लेकर सरकार को गिरने से बचाने के लिए गहलोत ने भाजपा के मंसूबों को पूरा नहीं होने दिया। सीएम गहलोत बचपन से पिता के साथ जादू किया करते थे। पिता बाबू लक्ष्मण सिंह गहलोत घूम-घूम कर जादू दिखाया करते थे। अशोक गहलोत को जादू दिखाने के कला उनके पिता से ही हासिल हुई है। जादूगर का बेटा होने के वजह से लोग मजाक भी उड़ा करते थे। लेकिन जिंदगी की दुनिया ऐसी बदली की गहलोत जादूगरी की दुनिया छोड़ सियासत में आ गए। जादू की एक खास बात होती है। इसका लोगों पर असर तो होता है, लेकिन किसी को पता नहीं चलता है। सीएम अशोक गहलोत की अब तक सियासत ऐसी ही रही है। वो कब जादू करते है और कब सियासत। विपक्ष को इसकी भनक तक नहीं लगती।

गहलोत जानबूझकर ठंडी चाय पीते हैं

सीएम अशोक गहलोत को करीब से जानने वाले कहते है कि वो एक पैकेट विस्किट हमेशा साथ लेकर चलते हैं ताकि कहीं भी खा सके। उन्हें ढाबे वाली चाय पंसद है। गहलोत को फाइव स्टार या घर की चाय से ज्यादा ढाबे वाली चाय पसंद है। कहते हैं गहलोत जानबूझकर ठंडी चाय पीते हैं ताकि मुद्दा ही बासी हो जाए। हमेशा मुस्कराने वाले गहलोत के बारे में कहा जाता है कि वे विरोधियों की गलती कभी भूलते नहीं है। 2008 में सीपी जोशी एक वोट से चुनाव हार गए थे। वे सीएम पद के दावेदार थे। लेकिन चुनाव हारने के कारण अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बनाए गए। कहा जाता है कि गहलोत ने ही जादू कर दिया। इसलिए सीपी जोशी एक वोट से चुनाव हार गए। कहते है 1971 के एक शरणार्थी कैंप में गहलोत के काम को देखकर इंदिरा गांधी काफी प्रभावित हुई।तबी से गहलोत गांधी परिवार के खास बन गए। इंदिरा गांधी ने गहलोत में सांगठनिक कुशलता देखी। जिसे सीएम गहलोत कई बार कांग्रेस पार्टी के लिए साबित भी कर चुके हैं।

पायलट समर्थक भी मानते हैं गहलोत का जादू

एक समय था जब दिल्ली की राजनीति में अहमद पटेल और गुलाम नबी आजाद के सामने बैठने को जगह नहीं मिलती थी। लेकिन आज उनकी गिनती कांग्रेस आलाकमान के करीबियों में होती है। गहलोत के करीबी कहते हैं कि वह बातचीत में जो उदाहरण देते हैं वह बड़ा सटीक होता है। गहलोत में सुनने की क्षमता ज्यादा है। किसी से संवाद नहीं तोड़ते। रिश्ता बिगड़ भी रहा है तो जोड़ने की गुंजाइश नहीं छोड़ते हैं। किसी को गुरुर नहीं दिखाते, लेकिन जो आंख से उतर गया। वह जल्दी ही जगह नहीं बना पाता है। गांव-खलिहान से लेकर हर तबके में उनका जादू चल जाता है। सचिन पायलट समर्थक विधायक भी मानते हैं कि गहलोत के पास कोई जादू की पूडिया है जिसे सुंघाकर सब अपने बस में कर लेते हैं। सीएम गहलोत 1998 से जोधपुर से पहली बार सांसद बने तब से उन्होंने राजनीति में पीछे मुडकर नहीं देखा।