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छुपम छुपाई के खेल में ऐसा छुपा कि… फिर कभी नहीं मिला

बीकानेर। बीछवाल थाना क्षेत्र का गैरसर गांव। इकबाल के घर में हंसी-ठिठौली व बच्चों के किलकारियां गूंज रही थी। अब वह सन्नाटा पसरा हुआ था। घर के बड़े बेटे की मौत से परिवार में कोहराम मचा है, वहीं गांव में मातम पसरा हुआ था। मां और बहिनों व छोटे भाई का रो-रोकर बुरा हाल है। शोक संतप्त परिवार को ढाढ़ंस बंधाने के लिए ग्रामीणों का तांता लगा रहा।

घर में मृतक की मां व बहिनों को संभाल पाना मुश्किल हो रहा है वहीं बड़े बुजुर्ग इकबाल को संभालने में लगे रहे। परिवार के लोग आपस में बुदबुदाते और एक-दूसरे को घटना से अवगत कराते-कराते फूट-फूट कर रोने लगते हैं। पूरे गांव में सन्नाटा पसरा है। रह-रह कर मां व बहिनों के क्रंदन से सन्नाटा टूटता है। महिलाएं उन्हें संभालती है। घटना के बाद से गांव में शाम तक किसी भी घर में चूल्हा तक नहीं जला। हालात यह थे कि सबकी आंखों में आंसू, चेहरे पर गम और जुबां बंद थी। हर कोई एक-दूसरे को दिलासा दे रहा था।

मां का फट गया कलेजा
इकबाल के तीन बेटियां और दो बेटे हैं। तीन बेटियां बड़ी है। फरान बड़ा बेटा है, जिसकी उम्र ११ वर्ष है। पांचों बहन भाई गुरुवार सुबह घर के आंगन व कमरे के बीच छुपम-छुपाई (लुकमिचनी) खेल रहे थे। खेल-खेल में कमरे बाहर आते समय फरार कमरे में बनी कपड़े टांगने की खूंटी पर बंधी रस्सी में उलझ गया। खूंटी पर बंधी रस्सी से फरान के गले में फंदा बन गया और वह उसमें उलझ कर लटक गया। काफी देर तक वह कमरे से बाहर नहीं आया तब मां अंदर गई। कमरे के अंदर का दृश्य देखकर इकबाल की पत्नी का कलेजा फट गया। वह जोर-जोर से चिल्लाने लगी। तब आस-पड़ोस के लोग एकत्रित हो गए। तक तक उसका पति भी खेत से घर आ गया। घर के आगे भीड़ देखकर वह घबरा गया। घर में प्रवेश करते ही हादसे का पता चला तो उसकी रुलाई फूट पड़ी।

गांव में नहीं जले चूल्हे, सन्नाटा पसरा
खेल-खेल में बच्चे के गले में फांसी का फंदा लगने से हुई मौत की खबर गांव में आग की तरह फैली। जिसे किसी को हादसे का पता चला वह इकबाल के घर की तरफ दौड़ पड़ा। आसपास के घरों में सुबह का बना भोजन तक कोई नहीं कर पाया। मोहल्ले में बच्चे भी गुमशुम हो गए। गांव पूरे में सन्नाटा पसर गया। परिवार की व गांव की बुजुर्ग महिलाएं फरान की मां व * को संभाल रही थी। फरान की मां फरार को याद कर बार-बार बेसुध हो रही थी।

काश! फरान को खेत ले जाता…
ग्रामीणों के मुताबिक फरान का पिता इकबाल रोते हुए बार-बारबबुदबुदा रहा था कि काश ! फरान को अपने साथ खेत ले जाता तो वह बच जाता। फरान ने गुरुवार सुबह पिता के साथ खेत जाने की जिद्द की थी लेकिन तेजगर्मी व उमस के कारण वह उसे नहीं ले गया। उसे क्या पता था कि जब वह खेत से लौटेगा तो उसका बेट उससे बहुत दूर जा चुका होगा। इकबाल को भरोसा ही नहीं हो रहा था कि फरार अब दुनिया में नहीं है लेकिन विधाता के विधान को कौन टाल सकता है। फरान अब हमेशा के लिए इस दुनिया से विदा हो चुका था।

एएसआई भी रो पड़े
पीबीएम अस्पताल की मोर्चरी में बालक का शव रखा गया। परिजनों के आने के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू हुई। मोर्चरी के आगे पिता व परिजनों को बिलखता देख बीछवाल थाने से पहुंचे एएसआई गुमानाराम भी भावुक हो गए। उनकी आंखें भी छलक आई। बाद में उन्होंने खुद का संभाला और मृतक के पिता इकबाल को सांत्वना दी।

यह है मामला
गैरसर गांव में गुरुवार सुबह घर के आंगन में बहिन-भाई खेल रहे थे। खेल-खेल में इकबाल का ११ वर्षीय बेटा कमरे में बनी खूंटी पर बंधी रस्सी से उलझ गया। रस्सी से गले में फांसी का फंद लग गया और उसकी मौत हो गई।

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