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जून में 4.14 लाख भक्तों ने चढ़ाए 36 करोड़ रुपए, दर्शन करने वालों की संख्या 5 हजार से ज्यादा करने का विचार

विजयवाड़ा

कोरोना की दूसरी लहर में आंशिक लॉकडाउन के दौरान भी तिरुपति में भगवान श्रीनिवासन के दर्शन जारी रहे। हर दिन औसत 15 से 18 हजार लोगों ने दर्शन किए। इस बीच जून में तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के हुंडी कलेक्शन (चढ़ावे) में मई की तुलना में 200% की वृद्धि देखी गई। जून में 4.14 लाख भक्तों ने करीब 36 करोड़ रु. चढ़ाए।

आम दिनों में रोज भक्त 2-3 करोड़ रु. चढ़ाते हैं। सार्वजनिक अवकाश या ब्रह्मोत्सव जैसे आयोजन पर यह आंकड़ा 5-7 करोड़ रु. होता है। मंदिर के संरक्षक तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) का कहना है कि भक्तों की संख्या 5000 तक सीमित करने के बावजूद चढ़ावे में बड़ा अंतर नहीं दिख रहा है।

टीटीडी कार्यकारी समिति ने हाल में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाने के इरादे से बैठक की। हालांकि ट्रस्ट ने श्रद्धालु की संख्या बढ़ाने से मना कर दिया है। टीटीडी के अध्यक्ष एसवी सुब्बा रेड्डी कहते हैं- ‘भक्तों की संख्या बढ़ाने पर फैसला लेंगे। लेकिन कितनी जल्दी, अभी यह नहीं कह सकता।’ वे बताते हैं कि अभी तिरुपति से 20 किमी पहले अलीपीरी टोलगेट से भक्त आ रहे हैं।

वहीं पर श्रद्धालुओं की जांच की जा रही है। सीधे आने वाली भीड़ को लौटा रहे हैं। कंटेनमेंट जोन से आने वाले श्रद्धालुओं को लौटाया जा रहा है, भले ही उन्होंने ऑनलाइन टिकट ले रखी हो। संस्थान की वेबसाइट के अनुसार यहां रोज 15 हजार लोग दर्शन कर रहे हैं। इस पर बोर्ड का कहना है कि जिन लोगों ने 31 दिसंबर से पहले ऑनलाइन टिकट ले रखे हैं, उन्हें भी अनुमति दे रहे हैं। इसलिए संख्या अधिक दिख रही है।

अभी अग्रिम बुकिंग के अलावा हर रोज 5000 टिकट जारी किए जा रहे हैं। टीटीडी के आंकड़ों के मुताबिक, दूसरी लहर के दौरान हुई आय घटकर 11.95 करोड़ रुपए रह गई थी। मार्च में हुंडी में 104 करोड़ रुपए आए थे। टीटीडी ने 2020-21 में हुंडी प्रसाद से 1,300 करोड़ रुपए से अधिक की आय का अनुमान लगाया था। दूसरी लहर की वजह से अनुमान गिरकर 725 करोड़ रुपए ही रह गया।

कमरे ऑड-ईवन तर्ज पर, हर 2 घंटे में सैनिटाइज किए जा रहे

तीर्थयात्रियों को तिरुमाला और तिरुपति में सभी आवास ऑड-ईवन आधार पर सिर्फ 24 घंटे के लिए दिए जा रहे हैं। सिर्फ दो लोगों को ही 24 घंटे रहने की अनुमति होगी। हर दो घंटे में कमरों का सैनिटाइजेशन किया जा रहा है। इसके अलावा मंदिर परिसर में कोविड-19 नियमों का पालन भी हो रहा है।

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