नई दिल्ली
दिल्ली के एक अस्पताल में डॉक्टरों ने घातक आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित 12 वर्षीय बच्चे को नई जिंदगी दी है। यह बच्चा घातक मैलाइनेंट हाइपरथर्मिया से पीड़ित था। इसमें बच्चे की रीढ़ की हड्डी 140-डिग्री तक बाईं ओर मुड़ी थी। यह एक दुर्लभ बीमारी है जो भारत में 100,000 लोगों में से एक में देखने को मिलती है। यह बीमारी दुर्लभ होने के साथ-साथ जानलेवा हो सकती है।
मैलाइनेंट हाइपरथर्मिया को बढ़ने से रोकने के लिए करीब छह घंटे तक चली सर्जरी के दौरान एनेस्थिसिया का उपयोग करना काफी मुश्किलों भरा रहा। इस बीमारी से पीड़ित मरीज को स्थिर रखने के लिए एकमात्र दवा- डेंट्रोलीन मौजूद है। यह दवा जर्मनी से मंगाई गई क्योंकि यह भारत में उपलब्ध नहीं थी। दूसरी समस्या शारीरिक घुमाव था, क्योंकि 140 डिग्री कोण के घुमाव को ठीक कर पाना संभव नहीं था। यह एक शारीरिक बीमारी थी जिसमे रीढ़ ‘एस’ या ‘सी’ के आकार में हो जाती है।
सर्जरी के सफल होने से किंशुक अक्टूबर से अपना पसंदीदा खेल क्रिकेट खेल सकता है। उसकी सर्जरी करना खतरनाक था क्योंकि इससे मृत्यु दर 80% तक बढ़ सकती थी। डेंट्रोलीन के होने से मृत्यु दर 2% तक कम हो जाती है।