दिग्गज एक्टर दिलीप कुमार का आज (बुधवार) 98 साल की उम्र में निधन हो गया है। उनके निधन की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर उनके फैंस, फ्रेंड्स और फैमिली मेंबर्स पोस्ट शेयर कर उन्हें याद कर रहे हैं। इस बीच डायरेक्टर सुभाष घई ने एक वीडियो शेयर कर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। इस वीडियो में सुभाष ने बताया कि फिल्म स्कूल खोलने का आइडिया दिलीप कुमार ने ही उन्हें दिया था। सुभाष ने 2015 में मुंबई में ‘व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल’ फिल्म स्कूल की स्थापना की थी।
दिलीप साहब मेरे सच्चे गुरू थे, मैंने उनके साथ 20 साल काम किया
सुभाष घई ने कहा वीडियो में कहा, “मैं नि:शब्द हूं। दिलीप साहब के खोने के गम को मैं बयां नहीं कर सकता। पिछले 15 साल उन्होंने बहुत सफर किया है। बिना किसी शको शुबहा के वो सिने जगत के सबसे बड़े युगपुरूष थे। वो मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा थे। मैंने उनके साथ 20 साल काम किया है। हमने साथ में तीन फिल्में ‘विधाता’, ‘कर्मा’, ‘सौदागर’ कीं। उन्होंने मेरी जिंदगी और सोचने का नजरिया बदल दिया। उन्होंने सिनेमा, समाज और राष्ट्र के बारे में सोचने का नया नजरिया डवेलप किया। वो मेरे सच्चे गुरू थे।”
फिल्म स्कूल खोलन का आइडिया दिलीप साहब ने ही दिया था
सुभाष घई ने आगे कहा, “मैं उनको हमेशा मिस करूंगा। दिलीप साहब जैसा कोई न था, न कोई होगा। बतौर इंसान और पेशेवर तौर पर वो मुकम्म्ल थे। दिलीप कुमार ने मुझे सिखाया कि अच्छी फिल्में और अच्छा इंसान कैसे बना जाए। मैं उनके लिए, सायरा भाभी और उनके परिवार के लिए दुआएं कर सकता हूं कि भगवान उनको हौसला दे। फिल्म स्कूल खोलन का विचार जब मेरे मन में आया था, तो वह आइडिया दिलीप साहब का ही था। वो हमेशा कहा करते थे कि सुभाष तुम्हें आने वाली जनरेशन के लिए कुछ करना चाहिए। दिलीप साहब मेरे लिए एक शिक्षक और भाई थे। हममें बहुत प्यार था।”
मेरे सबसे बड़े आइडल को मैंने खो दिया
इस वीडियो के कैप्शन में सुभाष घई ने लिखा, “एक युग चला गया उनका नाम है दिलीप कुमार। भारतीय सिनेमा के इतिहास के सुनहरे पन्नों में उन्हें आने वाली सदियों तक याद किया जाएगा। RIP साहब।” एक अन्य पोस्ट शेयर कर उन्होंने लिखा, “मेरे जीवन का सबसे दुखद दिन। दिलीप साहब उर्फ युसूफ भाई चले गए। मेरा व्यक्तिगत नुकसान हुआ है, मेरे सबसे बड़े आइडल को मैंने खो दिया। मेरे पास कोई शब्द नहीं है। RIP साहब।”
रेसूल पुकुट्टी ने भी दिलीप कुमार को किया याद
साउंड डिजाइनर रेसूल पुकुट्टी ने भी दिलीप कुमार को याद किया है। उन्होंने कहा, “दिलीप साहब का चले जाना ना सिर्फ इंडियन सिनेमा में, बल्कि मेरे लिए निजी जीवन में भी एक वैक्यूम सा उत्पन्न होना है। उनकी गैरमौजूदगी पूरे सबकॉन्टिनेंट के लिए बहुत बड़ा आघात है। दिलीप साहब हमारी जनरेशन के लिए नेहरूवियन इंडिया के कनेक्ट हैं, जिसे हमारे पूर्वजों ने बनाया था। वह कड़ी अब टूट चुकी है। अब से मुंबई बिना दिलीप साहब के होगी, वह सोच पाना भी बुरे सपने सा है। दिलीप साहब का जाना मेरे लिए पर्सनल लॉस है। वह इसलिए कि मैं उनसे पर्सनली मिल चुका हूं।”
रेसूल पुकुट्टी ने आगे कहा, “एफटीआईआई में वो हमारे कॉन्वोकेशन में आए थे। मुझे उनके हाथों से ही डिग्री मिली थी। इस तरह कहूं तो मैंने उनसे मिले आशीर्वाद से ही अपने फिल्मी करियर की शुरूआत की थी। अब जब मैं उनके जाने को देखता हूं, तो यह मेरे लिए पर्सनल लॉस सा हो चुका है। वो एक ऐसे एक्टर थे, जो बिना किसी फॉर्मल ट्रेनिंग के इंडस्ट्री में आए। उनके बाद के जो भी मेथड एक्टर रहे, वो सब दिलीप साहब को फॉलो करते रहे। कहने का मतलब यह कि एक ऐसा इंसान जिसने एक्टिंग की ट्रेनिंग तक नहीं ली, वह आगे चलकर एक्टिंग का इंस्टीट्यूशन बन गया।”
पुकुट्टी ने कहा, “मुझे याद है एक बार शाहरुख खान ने कहा था कि वो सलमान और आमिर तो बांद्रा में उनके बहुत करीब रहते हैं। बमुश्किल एक पत्थर फेंकने भर की दूरी पर। ठीक इसी तरह देवानंद, दिलीप साहब और राजकुमार रहा करते थे। वो तीनों पेशावर से इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में आए और बॉलीवुड की त्रिमूर्ति बन गए। आज वह त्रिमूर्ति चली गई। यह अपूरणीय क्षति है।”