बेंगलुरु (वार्ता). फिलीपींस के शोधकर्ता और व्यवसायी सैयद शेमर हुसैन ने करीब 10 हजार साल पुराने त्रिशूल और तीन हजार साल पुराने वज्र की खोज की ।
श्री हुसैन आज यहां पत्रकारों को बताया कि फिलीपींस में 2015 में खदान की खुदाई के दौरान उन्हें यह त्रिशूल और व्रज मिला था।
उन्होंने कहा, ह्लमैं 2012 से फिलीपींस में तांबे अयस्क और सोने के खनन से जुड़ा हुआ हूं। अपने कार्य के दौरान मैंने फिलीपींस में पर्याप्त मात्रा में समय बिताता और जब मैं पांच मई 2015 को स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर काम कर रहा था। तो सुपरवाइजर ने मुझे कुछ असामान्य खोजने के बाद खनन स्थल पर बुलाया।ह्व
उन्होंने कहा कि उन्हें दो ऐसी चीजें दिखाई गई जो कि खनन स्थल से निकाली गई थीं और उसे पानी से साफ किया गया था।
उन्होंने कहा कि इनमें से एक कुछ ऐसी थी जो मैंने पहले कभी नहीं देखी थी और इसलिए मैंने इसे एक लोहे की छड़ से छुआ। यह सामग्री धातु की तरह लग रहा थी। वह चीज अजीब लग रही थी। यह न तो एक जानवर के आकार में थी और न ही एक ज्ञात वस्तु जैसी ईश्वर की मूर्ति। दूसरी चीज एक त्रिशूल था।
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उन्होंने कहा कि चूंकि दोनों सामग्री एक साथ पायी गई थी इसलिए इनमें किसी तरह से जुड़ाव दिखाई दिया और शायद हिंदू पौराणिक कथाओं से जुड़ी हुई वस्तु थी।
उन्होंने कहा कि जिज्ञासा और हैरानी के कारण मैं उन चीजों को अपने घर ले आया तथा इसके बारे में अधिक जानने के लिए उनकी तस्वीरें दोस्तों और बुद्धिजीवियों के बीच सांझा की। इंटरनेट पर खोज करने पर और गहन शोध करने के बाद मैं यह समझ पाया यह त्रिशुल उसके साथ पाया गई अजीब की चीज एक वज्र है जो कि भगवान इंद्र का हथियार है और त्रिशुल भगवान शिव से संबंधित है।
उन्होंने कहा, ह्लबाद में, मैं भारत आया और भारत के पुरातत्व-सर्वेक्षण कार्यालय का दौरा किया, जहां इन सामग्री को उनके साथ वज्र और त्रिशुल के रूप में पंजीकृत कराया था।ह्व
उन्होंने कहा कि दो सामग्रियों को अंजनी मुंशी, सलाहकार कला और पुरातनपंथी पूर्व-पंजीकरण अधिकारी द्वारा प्रमाणित किया गया था।