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थोपे शासन और कानून के ढो रहे अवशेष : जाखड़

सीमा सन्देश न्यूज
श्रीगंगानगर।
देश पर हमलावारों द्वारा थोपे शासन और कानून के अवशेष हम आज भी ढो रहे है। इस्ट इंण्डिया कम्पनी ने 1947 में देश को भारत और पाकिस्तान दो हिस्सों में बांटते हुए डोमिनिनियन स्टेड बनाए। देश में वर्तमान में जो कानून है जनता के लिए, जनता के द्वारा और जनता के कानून नहीं है। यह बात स्वेदशी कानून सोसायटी अध्यक्ष पूर्व आइपीएस अधिकारी दिलीप जाखड़ ने एक प्रेस वार्ता के दौरान कही। जाखड़ ने कहा कि आजादी के बाद भी भारत में अनेक विदेशी कानून लागू हैं।
वर्तमान व्यवस्था में स्वदेशी कानून बनाए जाने की बेहद आवश्यकता है। इसलिए स्वदेशी कानून के लिए श्रीगांनगर जिला मुख्यालय पर स्वदेशी कानून सोसायटी द्वारा 25 जुलाई को प्रात: 11 बजे दी गंगानगर ट्रेडर्स एसोसिएशन परिसर में लोक संसद को आयोजन किया जाएगा। जाखड़ ने बताया कि जनता को न समझ आने वाली फारसी परिभाषाओं का आज भी इस्तेमाल किया जा रहा है। विधि आयोग, सेंटर फॉर सिविल सोसाईटी व स्वदेशी कानून सोसाईटी ने हजारों कानून छांटे हैं, जो आज के लोकतंत्र व अंतर्राष्ट्रीय कानून के विरोधी हैं। अंग्रेजी शोषक कानून व्यवस्था की तर्ज पर हाल ही में खेती, मण्डी व आवश्यक वस्तु अधिनियम बनाया है।
उन्होंने बताया कि ये काले कानून किसानों, बागवानों, पशुपालकों, राशन की दुकानों व मंण्डी के व्यापारियों के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी घातक है। कई लोक संसद व जनमत सर्वे करके सोसाईटी ने इन काले कानूनों की जगह पर सुनहरे कानून प्रस्तावित किये हैं।
उन्होंने बताया कि स्वदेशी कानून सोसाईटी परदेशी कानून व्यवस्था हटाकर जनहित के स्वदेशी कानून लागू कराने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात करेगी।

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