नई दिल्ली
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है। उत्पादन गतिविधियां जून में गिरने के बाद जुलाई में बढ़ीं। इससे जुड़ा अहम सूचकांक तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। लॉकडाउन के चलते IHS मार्किट पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) में उससे पिछले महीने यानी जून में गिरावट आई थी।
जून में गिरकर 48.1 पर आ गया था PMI
जून में IHS मार्किट परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स गिरकर 48.1 पर आ गया था, लेकिन अगले ही महीने यह सुधर कर 55.3 पर पहुंच गया। इस सूचकांक के 50 से ऊपर होने का मतलब ग्रोथ जबकि नीचे होना डीग्रोथ यानी उत्पादन गतिविधियों में गिरावट आना होता है। जून में उत्पादन गतिविधियां 11 महीनों में पहली बार घटी थीं।
जुलाई में GST कलेक्शन 1,16,393 करोड़ हो गया
PMI में बढ़ोतरी से दूसरे आर्थिक क्षेत्रों में भी सुधार आने की पुष्टि होती है। जैसे कि जुलाई में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन 1,16,393 करोड़ रुपए हो गया। जून में GST कलेक्शन पिछले आठ महीनों में पहली बार एक लाख करोड़ रुपए से नीचे 92,849 करोड़ रुपए पर आ गया था।
लॉकडाउन की सख्ती घटने, नए ऑर्डर का फायदा
IHS मार्किट की एसोसिएट डायरेक्टर- इकोनॉमिक्स, पॉलियाना डी लीमा कहती हैं, ‘जून में गिरावट के बाद अगले महीने ही उत्पादन में उछाल आना जोश बढ़ाने वाला है। कई जगहों पर लॉकडाउन की सख्ती में कमी होने के साथ ही नए ऑर्डर आने से एक तिहाई कंपनियों के उत्पादन में मासिक आधार पर उछाल आया है।’
विदेश से मांग बढ़ने से टोटल ऑर्डर बुक में इजाफा
जुलाई में मांग बढ़ने और लॉकडाउन की पाबंदियों को कम किए जाने से उत्पादन क्षेत्र की कंपनियों के उत्पादन में बढ़ोतरी हुई। विदेश से मांग बढ़ने से उनके टोटल ऑर्डर बुक में इजाफा हुआ है। जून में विदेशी बाजारों में मांग थोड़ी-बहुत घटने के बाद जुलाई में उनमें खासी बढ़ोतरी हुई है।
औद्योगिक उत्पादन दर 9.7% तक पहुंच सकती है
पॉलियाना का कहना है कि अगर कोविड संक्रमण में लगातार कमी आती है तो इस कैलेंडर ईयर में औद्योगिक उत्पादन दर 9.7% तक पहुंच सकती है। उनके मुताबिक, खरीदारी के आंकड़ों और इनपुट स्टॉक में बढ़ोतरी के साथ नए ऑर्डर और निर्यात उत्पादन में इजाफे से रोजगार बाजार में गहमागहमी बढ़ी है। 15 महीने से लगातार चल रहा छंटनी का दौर जुलाई में थम गया है।
कोविड के बाद रोजगार में पहली बार बढ़ोतरी
PMI में बढ़ोतरी उत्पादन क्षेत्र में रोजगार के मौके बनने का भी संदेश दे रहा है। पॉलियाना ने कहा कि कोविड फैलना शुरू होने के बाद से रोजगार के मौकों में मामूली ही सही, पहली बार बढ़ोतरी हुई है। कंपनियों का खर्च लगातार बढ़ रहा है और उत्पादन क्षमता का पूरा इस्तेमाल अब भी नहीं हो पा रहा है, लेकिन आने वाले महीनों में हालात और अच्छे हो सकते हैं।
RBI जस का तस रख सकता है रेपो रेट
कंपनियों की इनपुट कॉस्ट में मामूली बढ़ोतरी हुई है और कई कंपनियों ने बिक्री बढ़ाने की कोशिशों के बीच उसका बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला है। रिजर्व बैंक इसी हफ्ते हो रही पॉलिसी मीटिंग में अहम ब्याज दर (रेपो रेट) को जस का तस बनाए रख सकता है, क्योंकि महंगाई में कमी आना शुरू हो गया है। पॉलियाना के मुताबिक, RBI ग्रोथ को बढ़ावा देते रहने के मकसद से पॉलिसी दरों को जस का तस रहने दे सकता है।