सुधार करवा 12वीं कक्षा का दोबारा परिणाम जाने करवाने की मांग, अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधक को सौंपा ज्ञापन
अभिभावक बोले- मानसिक तनाव में बच्चों ने उठाया गलत कदम तो स्कूल प्रशासन व बोर्ड होगा जिम्मेवार हनुमानगढ़ (सीमा सन्देश न्यूज)। बोर्ड को अंक भेजने में पक्षपात एवं भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कक्षा 12वीं के बच्चों के अभिभावकों ने गुरुवार को जिला मुख्यालय पर स्थित विरासत सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रबंधक को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने परिणाम में सुधार करवाकर पुन: परिणाम जारी करवाने की मांग की। साथ ही अभिभावकों का कहना था कि होनहार एवं मेहनती होने के बावजूद कम अंक आने के चलते उनके बच्चे मानसिक तनाव में हैं। ऐसे में उन्होंने गलत कदम उठाया तो उसका जिम्मेवार विद्यालय प्रशासन व बोर्ड होगा। विद्यालय प्रबंधक से मिले अभिभावकों ने बताया कि उनके बच्चे विरासत सीनियर सेकेंडरी स्कूल में विज्ञान वर्ग के कक्षा 12वीं कक्षा के नियमित छात्र-छात्राएं हैं जो होनहार एवं मेहनती हैं। उन्होंने 10वीं बोर्ड की परीक्षा में लगभग 80 से 95 प्रतिशत अंक हासिल किए। इस बार कोविड-19 महामारी की वजह से न तो नियमित रूप से कक्षाएं लगी तथा न ही परीक्षाएं हुई। मात्र सरकार के नियमानुसार विद्यालय प्रशासन एवं कर्मचारियों के माध्यम से बोर्ड को अंक भेजे जाने थे। लेकिन विद्यालय प्रशासन ने बच्चों के अंक सही तरीके से न भेजकर पक्षपात एवं भेदभावपूर्ण तरीके से भेजे गए हैं। इसके आधार पर बोर्ड की ओर से बच्चों के अंक निर्धारण कर परिणाम जारी किया गया है। बोर्ड ने भी न तो बच्चों के दसवीं के अंकों का अवलोकन किया तथा न ही जिले के अन्य विद्यालयों के परिणाम को ध्यान में रखा गया। बच्चों के साथ पक्षपात एवं भेदभावपूर्ण रवैया अपनाकर परिणाम जारी किया गया है। विरासत सीनियर सेकेंडरी स्कूल की ओर से भी भेजे गए अंकों में बच्चों के साथ भेदभाव रखकर अंकों में अत्यधिक अन्तर रखा गया है। उसमें भी बोर्ड की ओर से उचित मापदण्ड के अनुसार अंक घटाए एवं बढ़ाए नहीं हैं। एक बच्चे के तो जितने अंक भेजे गए उतने ही अंक देकर परिणाम जारी कर दिया गया है परन्तु दूसरे बच्चों के अंक में 20 प्रतिशत से अधिक अंकों की कटौती कर परिणाम जारी किया गया है जो कि अवैध एवं विधि विरूद्ध तरीके से पक्षपात एवं भेदभावपूर्ण तरीके से जारी किया गया है। इसका खामियाजा न केवल बच्चों को भुगतना पड़ रहा है, अंक भेजने में किए गए भेदभाव के कारण अभिभावकों को भी भुगतना पड़ रहा है। परिणाम भेदभावपूर्ण होने के कारण बच्चे मानसिक रूप से तनावग्रस्त हो चुके हैं। परिणाम जारी होने के समय से अभिभावकों को भी तनावग्रस्त रहना पड़ रहा है कि कहीं बच्चे मानसिक तनाव के चलते कोई अप्रिय कदम न उठा लें। जिले के अन्य विद्यालयों का परिणाम अच्छा रहा है। विरासत सीनियर सेकेंडरी स्कूल का 10वीं का परिणाम भी अच्छा रहा है परन्तु 12वीं कक्षा का परिणाम भेदभाव पूर्ण एवं निम्न रहा है। ऐसी स्थिति में परिणाम में सुधार किया जाना न्यायहित में आवश्यक है। अभिभावकों ने मांग की कि बच्चों के 10वीं के अंकों एवं जिले के अन्य विद्यालयों के परिणाम को ध्यान में रखते हुए पुन: अंक भेजकर पुन: परिणाम जारी करवाया जाए। अन्यथा यदि किसी बच्चे ने मानसिक तनाव के चलते कोई अप्रिय कदम उठा लिया तो इसकी सम्पूर्ण जिम्मेवारी विद्यालय प्रशासन व कर्मचारियों तथा बोर्ड सचिव की होगी।