‘भुज: प्राइड ऑफ इंडिया’ से अजय देवगन फिर से अपने पुराने एक्शन अवतार में वापसी कर चुके हैं। डायरेक्टर अभिषेक दुधइया ने बताया, “फिल्म के एक सीन है। उसमें पाकिस्तानी फाइटर प्लेन जमीन पर भुज एयरबेस पर हमला करते हैं। उससे बचने के लिए भार्तीय सेना को इमारतों और लैंप पोस्ट पर जल रहे फानूस को बुझाना था। उसे पैर से ठोकर मार कर बुझाना था। वैसा करने में हमारे फाइट मास्टर पीटर ने दर्जनों बार प्रयास किया, मगर वो असफल रहे। खुद मैंने भी अजय सर के आने से पहले 20 से 30 बार इसे अटेम्प्ट किया, मगर मैं भी ऐसा नहीं कर सका। आखिरकार जब अजय सर आए। उन्हें वो शॉट समझाया गया, तो उन्होंने एक ही बार में पत्थर मार फानूस को बुझा दिया। वो देख कर सेट पर सब क्लैप कर उठे।”
फिल्म में 70 के दशक में पाए जाने वाले शक्तिमान के ट्रक यूज हुए हैं
अभिषेक आगे बताते हैं, “फिल्म एक्शन से भरी हुई है। फिल्म 50 फीसदी सीन VFX वाले हैं और उन्हें ज्यादातर अजय देवगन ने खुद किए हैं। इसमें बॉडी डबल का इस्तेमाल नहीं हुआ है। एक सीन में अजय सर ने खुद ही भारी भरकम ट्रक को न केवल ड्राइव किया, बल्कि उसे अपने एक्सिस पर गोल घुमाया भी है। वो ट्रक आज के जमाने के नहीं थे, बल्की 70 के दशक में पाए जाने वाले शक्तिमान के ट्रक थे। उसका प्रोडक्शन 30 साल पहले बंद हो चुका था। आज के ट्रक तो अपने एक्सिस पर टर्न हो जाते हैं, मगर शक्तिमान वाले ट्रक को टर्न करने में काफी मशक्कत होती है। हमने एहतियातन उन्हें केबल से दूसरी तरफ से बांध भी रखा था। मगर टर्न करने के दौरान केबल उखड़ गया। अजय सर सीट से नीचे भी गिर गए। फिर भी उन्होंने ट्रक को 90 डिग्री पर टर्न कर के ही दम लिया।”
फिल्म की शूटिंग के लिए मांडवी में थी 1250 लोगों की यूनिट
फिल्म भारत पाकिस्तान जंग पर बेस्ड है। लिहाजा इसमें 12 से 15 इंडियन फाइटर प्लेन बनाए गए हैं। उतने ही पाकिस्तानी फाइटर प्लेन भी बने हैं। उसी तादाद में टैंक भी बनाए गए हैं। अभिषेक के शब्दों में, “वो टैंक असली टैंकों से कम नहीं लगते थे। कुछ ओरिजिनल टैंक हमें इंडियन आर्मी से भी मिले थे। फिल्म पर बहुत खर्चा हुआ है। मांडवी में तो 1250 लोगों की यूनिट थी। 180 फाइट मास्टर मद्रास से आए थे। उतने ही मुंबई से भी थे। 300 लोगों की फीमेल जूनियर आर्टिस्ट की टीम थी और 250 क्रू मेंबर्स थे। मंजर कुछ ऐसे बने कि सेट के बाहर मांडवी के स्थानीय लोग स्ट्रीट फूड और गिफ्ट आयटमों के स्टॉल लगाने लगे। उन स्टॉल्स से हम लोगों ने मुंबई में अपनी फैमिली के लिए थोड़ी बहुत खरीदारी भी की थी।”