अजमेर
दरगाह और पुष्कर में दर्शन के लिए देशभर के VVIP नेता व अधिकारी अक्सर अजमेर पहुंचते रहते हैं। नेता, अफसर व अन्य लोग सर्किट हाउस में आराम फरमाते हैं। यहां रुककर खाना भी खाते हैं, लेकिन इनमें से कईं मेहमान ऐसे हैं, जिन्होंने यहां का बिल चुकाने की जहमत नहीं उठाई। बिना बिल चुकाए ही चले गए।
ऐसे लोगों में राजस्थान व बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्री, देश के कई प्रदेशों के मंत्री, भारतीय प्रशासनिक सेवा सहित अन्य विभागों के आला अफसर सहित अन्य लोग शामिल हैं। इनके रुपए आज भी बकाया चल रहे हैं। प्रशासन की मानें तो वे लगातार मौखिक, लिखित व टेलीफोन के जरिए बकायादारों से सम्पर्क करते हैं, लेकिन वर्षों से बकाया यह राशि अब तक नहीं वसूली जा सकी है। इसमें से कई तो दिवंगत हो चुके हैं और कई रिटायर्ड हो चुके हैं।
अजमेर सर्किट हाउस प्रशासन की ओर से सूचना के अधिकार के तहत तरुण अग्रवाल को लिस्ट उपलब्ध कराई है। लिस्ट के अनुसार 167 नेता, अफसर व अन्य लोग बकायादारों में शामिल हैं। 68 हजार 853 रुपए नेताओं व 2 लाख 35 हजार 963.50 रुपए अफसरों के हैं। इसी प्रकार 14,925 रुपए अन्य लोगों के बकाया है।
इन पूर्व मुख्यमंत्रियों का भी बकाया
पूर्व मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत के तीन बार के सर्किट हाउस में रुकने की राशि बकाया है। इसमें पहली बार 4 फरवरी 2002 के 1364 रुपए, 26 अप्रैल 2002 के 634 रुपए, 23 जून 2002 के 501 रुपए बकाया चल रहा है। इसी प्रकार बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के 3 सितम्बर 2005 के 705 रुपए बकाया है।
घड़साना विवाद से संबिधित नेताओं के बिल बकाया
लिस्ट में एडीएम सिटी के नाम से घड़साना विवाद से संबधित नेताओं के 5 बिल भी 12 दिसम्बर 2004 से बकाया है, जिनकी कुल राशि 1809 रुपए है।
चुनाव पर्यवेक्षकों के बिल भी बकाया
लिस्ट में चुनाव पर्यवेक्षकों के 12 बिल बकाया का जिक्र भी है, जो करीब सवा लाख रुपए के हैं। ये बिल 5 अप्रैल 2019 से 27 नवम्बर 2019 तक के हैं।
बकाया पर लगा रखी है रोक
आगंतुकों के लिए सर्किट हाउस आदि में ठहरने के सभी भुगतान अतिथि को कमरा छोड़ते समय किया जाना अनिवार्य है। मेन्यअुल के अध्याय 5 में प्रदत्त निर्देशानुसार सर्किट हाउस में बकाया छोड़ने/रखने पर पूर्ण रूप से रोक लगाई हुई है।
वसूलने के लिए कर रहे प्रयास
सर्किट हाउस प्रबन्धक सतेन्द्र बिहारी माथुर ने कहा कि बकायादारों में शामिल नेताओं व अफसरों को दूरभाष, मौखिक और लिखित रूप से सूचना कर वसूलने के लिए नियमित रूप से प्रयास किए जा रहे हैं।