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टेस्ला को रियायत मिल सकती है:लोकल मार्केट से खरीदारी बढ़ानी होगी और इंडिया में प्रॉडक्शन का प्लान बताना होगा

नई दिल्ली

टेस्ला ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर लगने वाला इंपोर्ट टैक्स घटाने की जो मांग की है, उस पर सरकार तभी विचार करेगी जब कंपनी भारत में प्रोक्योरमेंट यानी अपनी गाड़ियों में लगने वाले सामान की खरीदारी बढ़ाएगी। मामले के जानकार एक सूत्र ने बताया कि सरकार कंपनी से यह भी जानना चाहती है कि उसने भारत में अपनी इलेक्ट्रिक गाड़ियों के उत्पादन को लेकर क्या योजनाएं बनाई हैं।

भारी उद्योग मंत्रालय और वित्त मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में हुई एक बैठक में कंपनी से प्रॉडक्शन और प्रोक्योरमेंट का ब्योरा मांगा था। फिलहाल, सरकार इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर लगने वाला टैक्स घटाने की एलन मस्क की मांग की पड़ताल कर रही है।

सरकार ने पूछा, आधी बनी गाड़ियों के आयात के बारे में क्या ख्याल है?

सूत्र के मुताबिक संबंधित विभागों ने टेस्ला से यह भी पूछा है कि पूरी तरह से बनी कारों के आयात के बजाय नॉक्ड डाउन यूनिट या आधी बनी गाड़ियों के आयात के बारे में उसका क्या ख्याल है। दरअसल, सड़कों पर भागने के लिए पूरी तरह तैयार गाड़ियों के मुकाबले नॉक्ड डाउन यूनिट या अधबनी कारों पर कम इंपोर्ट टैक्स लगता है।

नॉक्ड डाउन यूनिट वह होती है, जिसमें गाड़ी बनाने के लिए जरूरी हर चीज होती है, लेकिन अलग-अलग। इस तरह की यूनिट को इंपोर्ट होकर आने के बाद असेंबल किया जाता है।

टेस्ला चाहती है कि इंपोर्ट ड्यूटी 40% रहे और 10% का सरचार्ज हटे

कैलिफोर्निया की कंपनी टेस्ला ने जुलाई में मोदी सरकार को पत्र लिखकर इलेक्ट्रिक गाड़ियों के आयात पर लगने वाला टैक्स घटाने की मांग की थी। 40 हजार डॉलर या इससे कम की गाड़ी विदेश से मंगाए जाने पर 60% जबकि 40 हजार डॉलर से ज्यादा की गाड़ी पर 100% की इंपोर्ट ड्यूटी लगती है।

टेस्ला चाहती है कि सस्ती और महंगी दोनों तरह की इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी घटाकर 40% कर दी जाए और 10% का सोशल वेल्फेयर सरचार्ज भी हटा लिया जाए। इस सरचार्ज से हासिल होने वाली रकम स्वास्थ्य और शिक्षा कार्यक्रमों में लगाई जाती है।

भारत से 10 करोड़ डॉलर के कंपोनेंट खरीद चुकी है, टेस्ला का दावा

बैठक में टेस्ला ने दावा किया था कि वह भारत से अब तक लगभग 10 करोड़ डॉलर के कंपोनेंट खरीद चुकी है। उसने यह भी कहा था कि अगर टैक्स में किसी तरह की रियायत मिलती है तो भारत से उसका प्रोक्योरमेंट बढ़ेगा।

कंपनी ने यह भी कहा है कि वह भारत आने के बाद सेल्स और सर्विस और चार्जिंग स्टेशन बनाने के लिए सीधे तौर पर बड़ा निवेश करेगी। उसने कहा है कि मैन्युफैक्चरिंग के लिए बड़े पैमाने पर निवेश करने पर भी विचार करेगी।

इंपोर्टेड कारों से इंडियन मार्केट की टेस्टिंग करना चाहते हैं मस्क

मस्क अपार संभावनाओं वाले इस देश में कारोबार करने में कई साल से दिलचस्पी दिखा रहे हैं। लेकिन उन्हें इस बात की शिकायत है कि टैक्स बहुत बहुत ज्यादा होने के चलते इंपोर्टेड कारों से यहां के बाजार की टेस्टिंग नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि इंपोर्ट ड्यूटी बहुत ज्यादा होने की वजह से उनकी इलेक्ट्रिक गाड़ियां यहां किफायती नहीं रह पाएंगी।

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