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प्रेग्नेंसी के दौरान कोविड-19 होने पर बच्चे की समय से पहले डिलीवरी होने का खतरा, बीपी या मोटापा बढ़ने पर रिस्क 160 गुना तक बढ़ जाता है

प्रेग्नेंसी के दौरान कोरोना का संक्रमण होने पर बच्चे के समय से पहले जन्म लेने का खतरा बढ़ता है। यह दावा सैन फ्रैन्सिस्को की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है। ऐसी महिलाओं में 32 हफ्ते से पहले बच्चे की प्री-मैच्योर डिलीवरी हो सकती है। प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में कोविड से संक्रमित होने का खतरा 60 फीसदी तक ज्यादा रहता है।

ऐसे हुई रिसर्च
शोधकर्ताओं ने कैलिफोर्निया में जुलाई 2020 से जनवरी 2021 के बीच जन्मे बच्चों का बर्थ सर्टिफिकेट देखा। इस दौरान 2,40,157 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें 9 हजार बच्चों की मांओं को प्रेग्नेंसी के दौरान कोरोना हुआ था। रिसर्च में सामने आया कि सामान्य गर्भवती महिलाओं में 8.7 फीसदी और कोविड से जूझने वाली गर्भवती महिलाओं में 11.8 फीसदी बच्चों की प्री-मैच्योर डिलीवरी हुई।

बीपी और मोटापा बढ़ा तो रिस्क और ज्यादा
शोधकर्ताओं का कहना है, प्रेग्नेंट महिलाओं में कोविड के संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है। ऐसे में जो संक्रमित महिलाएं हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और मोटापे से जूझती हैं, उनमें प्री-मैच्योर डिलीवरी होने का खतरा 160 फीसदी तक और बढ़ जाता है।

प्री-मैच्योर डिलीवरी यानी बच्चे में कॉम्प्लिकेशन का रिस्क
शोधकर्ता देबोराह केरासेक के मुताबिक, बच्चे की प्री-मैच्योर डिलीवरी होने पर कई तरह का रिस्क बढ़ता है। इनमें कई तरह के कॉम्प्लिकेशन बढ़ते हैं। रिसर्च के परिणाम बताते हैं, प्री-मैच्योर डिलीवरी को रोकने के लिए प्रेग्नेंसी के दौरान कोरोना से बचाव करना बेहद जरूरी है।

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